जडेजा का संघर्ष, 10 रूपये रोजाना पर जिए और पूरा किया मां का सपना।

कई लोग सपना देखते है कुछ बनने का Success होने का और अपनी मेहनत और लगन के दम पर वह सफल होते भी है। आज बात करेंगे ऐसे ही सौराष्ट्र के लड़के के यानि रविंद्र जडेजा के बारेमे।
जडेजा ने काफी संघर्ष कर सफलता हासिल की है। एक समय था जब उन्हें रोज के खर्चे के लिए केवल 10 रूपये मिलते थे। क्रिकेट खेलने के लिए उनकी दीवानगी इतनी ज्यादा थी कि वे नींदों में भी क्रिकेट की बातें करते थे।
जडेजा को क्रिकेटर बनाने में उनकी मां का बड़ा योगदान था लेकिन जब जडेजा को टीम इंडिया में जगह मिली तो वे इस दुनिया में नहीं थीं। उनकी मां नर्स थी और पिता वॉचमैन थे, इसके चलते उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था लेकिन जडेजा ने अपनी जिद के बूते क्रिकेट को अपना कॅरियर बनाया। जडेजा का जन्म गुजरात के जामनगर जिले के नवगाम खेड में छह दिसंबर 1988 को हुआ। उनके पिता अनिरूद्ध सिंह सेना में थे लेकिन एक इंजरी के चलते उन्हें फौज छोड़नी पड़ी और सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करनी पड़ी। उनकी मांग लता नर्स थी।
नींदों में भी देखते थे Cricketer बनने का सपना।
जडेजा क्रिकेट को लेकर काफी पैशनेट थे और नींदों में भी पकड़ो, फेंकों बोलते रहते थे। इस पर उनके पिता उन्हें पूर्व क्रिकेटर महेन्द्र सिंह चौहान के पास ले गए। हालांकि उनके पिता चाहते थे रवीन्द्र जडेजा सेना में जाए लेकिन पत्नी लता के कहने पर उन्होंने यह मंशा छोड़ दी।
उनके पिता बताते हैं कि मैं रवीन्द्र को एक आर्मी ऑफिसर के रूप में देखना चाहता था लेकिन उसने क्रिकेट को चुना। मैंने उसे कहाकि जो करना है उसे बेस्ट करो वर्ना ना ऑफिसर बन पाएगा और ना क्रिकेटर। जडेजा अपनी मां के काफी करीब थे और जब उनका निधन हुआ तो वे काफी टूट गए। उन्होने क्रिकेट छोड़ने का फैसला कर लिया था लेकिन अपनी बड़ी बहन के कहने पर उन्होंने खुद को संभाला। मां के निधन के बाद बहन ने ही जडेजा को सहारा दिया। जिस साल उनकी मां का निधन हुआ उसी साल जडेजा को सौराष्ट्र टीम में जगह मिली।
16 साल की उम्र में खेला अंडर-22 टूर्नामेंट
उनके कोच बताते हैं कि जडेजा सबसे पहले मैदान में प्रेक्टिस में आता और सबसे अंत में जाता। वह घंटों तक बल्लेबाजी करता रहता, घंटों बॉलिंग करता और इसी तरह फील्डिंग करता। जडेजा बचपन में काफी शैतान भी थे लेकिन कोच महेन्द्र सिंह के एक थप्पड़ ने उन्हें समझदार बना दिया। इस बारे वे बताते हैं कि एक क्लब मैच में मैंने उसे सीनियर खिलाडियों के खिलाफ खिलाया। उसकी पहली दो गेंदों पर एक चौका और छक्का लगा। मैंने बीच ओवर में उसे थप्पड़ मार दिया इसके बाद उसने पहली बार पांच विकेट लिए वो भी केवल 33 रन देकर।
वे कहते हैं कि मैंने सबसे ज्यादा उसे मारा लेकिन मैं जानता था कि वह भारत के लिए खेलेगा। 2002 में जडेजा ने सौराष्ट्र अंडर-14 टीम की ओर से खेलते हुए पहले ही मैच में 87 रन बनाए और 72 रन पर चार विकेट लिए। अगले एक साल में अपने जबरदस्त प्रदर्शन के बूते उन्हें अंडर-19 टीम में जगह मिल गई। वहीं 16 साल की उम्र में अंडर-22 टीम में एंट्री मिली। इसी के चलते अंडर-19 टीम इंडिया में जगह मिली। इस टूर्नामेंट में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार विकेट लिए जबकि फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 16 रन पर तीन विकेट लिए जिसके चलते पाक 125 रन पर सिमट गया हालांकि यह मैच भारत हार गया।

तीन तिहरे शतक लगाने वाले
जडेजा ने 121 वनडे में 1804 रन बनाए जिसमें 10 अर्धशतक शामिल है। इसमें उन्होंने 144 विकेट भी लिए हैं। वहीं 12 टेस्ट में 45 विकेट लिए हैं और 364 रन बनाए हैं। दिलचस्प बात है कि जडेजा ने घरेलू क्रिकेट में तीन तिहरे शतक लगाए हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक भी शतक नहीं लगा पाए हैं।
पहले मैच में फिफ्टी से नंबर वन गेंदबाज तक
जडेजा ने अपने प्रदर्शन केे बूते फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू करने से पहले ही इंडिया ए में जगह बना ली थी। 2006-07 में जडेजा ने सौराष्ट्र की ओर रणजी ट्रॉफी में कदम रखा। 2008 में जडेजा ने एक बार फिर अंडर-19 वर्ल्ड कप खेला। विराट कोहली की कप्तानी में खेले गए इस टूर्नामेंट को भारत ने जीता और जडेजा ने 10 विकेट लिए। इसके बाद राजस्थान रॉयल्स ने रवीन्द्र जडेजा को आईपीएल के लिए साइन कर लिया। जडेजा की काबिलियत को देखकर शेन वार्न ने उन्हें रॉक स्टार क हा। अगले साल उन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 10 मैच में 776 रन बनाए और 45 विकेट भी लिए। वहीं लिस्ट ए में 198 रन बनाए और छह विकेट लिए थे। इसके बूते उन्हें श्रीलंका दौरे के लिए वनडे टीम में शामिल किया गया। अपने पहले ही वनडे में उन्होंने नाबाद 60 रन बनाए। हालांकि जडेजा को असली पहचान मिली 2013 चैंपियंस ट्रॉफी से। 2015 टूर्नामेंट में उन्होंने सबसे ज्यादा विकेट लिए और गोल्डन बॉल जीती। साथ ही ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरिज में 25 विकेट लिए, साथ ही छह में से 5 बार विपक्षी कप्तान माइकल क्लार्क को आउट किया। 2015 मै जडेजा वनडे के नंबर वन गेंदबाज बन थेे।
जडेजा ने अपनी life में जो कुछ पाया है अपनी मेहनत के दम पर दोस्तों हम भी अपनी life में success हो सकते है। बस शर्ट ये है कि आप को अपने काम continue, लगन और धीरज के साथ करना होगा। So friends आप को ये story अच्छी लगे तो कृपिया Share करना न भूले।
धन्यवाद।
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Author: Mukesh Beldar

Hello friends I am Mukesh muje logo ki madad karna achcha lagta hai. Or isi liye mene yah blog banaya hai. Is blog se agar ek bhi article apko kam aa jaye to mera blog banane ka udesya safal hoga.

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