भगवान शिव क्यों रहते है श्मशान में, क्यों भूत-प्रेत है उनके गण?

भगवान शिव जितने रहस्यमयी हैं, उनकी वेश-भूषा व उनसे जुड़े तथ्य भी उतने ही विचित्र है। शिव श्मशान में निवास करते हैं, गले में नाग धारण करते हैं, भांग व धतूरा ग्रहण करते हैं। आदि न जाने कितने रोचक तथ्य इनके साथ जुड़े हैं। महाशिवरात्रि (7 मार्च, सोमवार) के अवसर पर हम आपको भगवान शिव से जुड़ी ऐसी ही रोचक बातें व इनमें छिपे लाइफ मैनेजमेंट के सूत्रों के बारे में बता रहे हैं, जो इस प्रकार हैं-

1. भगवान शिव को क्यों कहते श्मशान का निवासी?
भगवान शिव को वैसे तो परिवार का देवता कहा जाता है, लेकिन फिर भी श्मशान में निवास करते हैं। भगवान शिव के सांसारिक होते हुए भी श्मशान में निवास करने के पीछे लाइफ मैनेजमेंट का एक गूढ़ सूत्र छिपा है। संसार मोह-माया का प्रतीक है जबकि श्मशान वैराग्य का।
भगवान शिव कहते हैं कि संसार में रहते हुए अपने कर्तव्य पूरे करो, लेकिन मोह-माया से दूर रहो। क्योंकि ये संसार तो नश्वर है। एक न एक दिन ये सबकुछ नष्ट होने वाला है। इसलिए संसार में रहते हुए भी किसी से मोह मत रखो और अपने कर्तव्य पूरे करते हुए वैरागी की तरह आचरण करो।

2. क्यों है भूत-प्रेत शिव के गण?
शिव को संहार का देवता कहा गया है। अर्थात जब मनुष्य अपनी सभी मर्यादाओं को तोड़ने लगता है तब शिव उसका संहार कर देते हैं। जिन्हें अपने पाप कर्मों का फल भोगना बचा रहता है वे ही प्रेतयोनि को प्राप्त होते हैं। चूंकि शिव संहार के देवता हैं। इसलिए इनको दंड भी वे ही देते हैं। इसलिए शिव को भूत-प्रेतों का देवता भी कहा जाता है।
दरअसल यह जो भूत-प्रेत है वह कुछ और नहीं बल्कि सूक्ष्म शरीर का प्रतीक है। भगवान शिव का यह संदेश है कि हर तरह के जीव जिससे सब घृणा करते हैं या भय करते हैं वे भी शिव के समीप पहुंच सकते हैं, केवल शर्त है कि वे अपना सर्वस्व शिव को समर्पित कर दें।

3. भगवान शिव गले में क्यों धारण करते हैं नाग?
भगवान शिव जितने रहस्यमयी हैं, उनका वस्त्र व आभूषण भी उतने ही विचित्र हैं। सांसारिक लोग जिनसे दूर भागते हैं। भगवान शिव उसे ही अपने साथ रखते हैं। भगवान शिव एकमात्र ऐसे देवता हैं जो गले में नाग धारण करते हैं। देखा जाए तो नाग बहुत ही खतरनाक प्राणी है, लेकिन वह बिना कारण किसी को नहीं काटता।
नाग पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण जीव है। जाने-अंजाने में ये मनुष्यों की सहायता ही करता है। कुछ लोग डर कर या अपने निजी स्वार्थ के लिए नागों को मार देते हैं। लाइफ मैनेजमेंट के दृष्टिकोण से देखा जाए तो भगवान शिव नाग को गले में धारण कर ये संदेश देते हैं कि जीवन चक्र में हर प्राणी का अपना विशेष योगदान है। इसलिए बिना वजह किसी प्राणी की हत्या न करें।

4. भगवान शिव के हाथ में त्रिशूल क्यों?
त्रिशूल भगवान शिव का प्रमुख अस्त्र है। यदि त्रिशूल का प्रतीक चित्र देखें तो उसमें तीन नुकीले सिरे दिखते हैं। यूं तो यह अस्त्र संहार का प्रतीक है पर वास्तव में यह बहुत ही गूढ़ बात बताता है। संसार में तीन तरह की प्रवृत्तियां होती हैं- सत, रज और तम। सत मतलब सात्विक, रज मतलब सांसारिक और तम मतलब तामसी अर्थात निशाचरी प्रवृति।
हर मनुष्य में ये तीनों प्रवृत्तियां पाई जाती हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि इनकी मात्रा में अंतर होता है। त्रिशूल के तीन नुकीले सिरे इन तीनों प्रवृत्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। त्रिशूल के माध्यम से भगवान शिव यह संदेश देते हैं कि इन गुणों पर हमारा पूर्ण नियंत्रण हो। यह त्रिशूल तभी उठाया जाए जब कोई मुश्किल आए। तभी इन तीन गुणों का आवश्यकतानुसार उपयोग हो।

5. भगवान शिव ने क्यों पीया था जहर?
देवताओं और दानवों द्वारा किए गए समुद्र मंथन से निकला विष भगवान शंकर ने अपने कंठ में धारण किया था। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ के नाम से प्रसिद्ध हुए। समुद्र मंथन का अर्थ है अपने मन को मथना, विचारों का मंथन करना। मन में असंख्य विचार और भावनाएं होती हैं, उन्हें मथ कर निकालना और अच्छे विचारों को अपनाना। हम जब अपने मन को मथेंगे तो सबसे पहले बुरे विचार ही निकलेंगे।
यही विष हैं, विष बुराइयों का प्रतीक है। शिव ने उसे अपने कंठ में धारण किया। उसे अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। शिव का विष पीना हमें यह संदेश देता है कि हमें बुराइयों को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। बुराइयों का हर कदम पर सामना करना चाहिए। शिव द्वारा विष पीना यह भी सीख देता है कि यदि कोई बुराई पैदा हो रही हो तो हम उसे दूसरों तक नहीं पहुंचने दें।

6. क्यों है भगवान शंकर का वाहन बैल?
भगवान शंकर का वाहन नंदी यानी बैल है। बैल बहुत ही मेहनती जीव होता है। वह शक्तिशाली होने के बावजूद शांत एवं भोला होता है। वैसे ही भगवान शिव भी परमयोगी एवं शक्तिशाली होते हुए भी परम शांत एवं इतने भोले हैं कि उनका एक नाम भोलेनाथ भी जगत में प्रसिद्ध है। भगवान शंकर ने जिस तरह कामदेव को भस्म कर उस पर विजय प्राप्त की थी, उसी तरह उनका वाहन भी कामी नही होता। उसका काम पर पूरा नियंत्रण होता है।

साथ ही नंदी पुरुषार्थ का भी प्रतीक माना गया है। कड़ी मेहनत करने के बाद भी बैल कभी थकता नहीं है। वह लगातार अपने कर्म करते रहता है। इसका अर्थ है कि हमें भी सदैव अपना कर्म करते रहना चाहिए। कर्म करते रहने के कारण जिस तरह नंदी शिव को प्रिय है, उसी प्रकार हम भी भगवान शंकर की कृपा पा सकते हैं।

7. क्यों है भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा?

भगवान शिव का एक नाम भालचंद्र भी प्रसिद्ध है। भालचंद्र का अर्थ है मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाला। चंद्रमा का स्वभाव शीतल होता है। चंद्रमा की किरणें भी शीतलता प्रदान करती हैं। लाइफ मैनेजमेंट के दृष्टिकोण से देखा जाए तो भगवान शिव कहते हैं कि जीवन में कितनी भी बड़ी समस्या क्यों न आ जाए, दिमाग हमेशा शांत ही रखना चाहिए। यदि दिमाग शांत रहेगा तो बड़ी से बड़ी समस्या का हल भी निकल आएगा।
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक ग्रह माना गया है। मन की प्रवृत्ति बहुत चंचल होती है। भगवान शिव का चंद्रमा को धारण करने का अर्थ है कि मन को सदैव अपने काबू में रखना चाहिए। मन भटकेगा तो लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हो पाएगी। जिसने मन पर नियंत्रण कर लिया, वह अपने जीवन में कठिन से कठिन लक्ष्य भी आसानी से पा लेता है।

8. क्यों हैं भगवान शिव की तीन आंखें?

धर्म ग्रंथों के अनुसार, सभी देवताओं की दो आंखें हैं, लेकिन एकमात्र शिव ही ऐसे देवता हैं जिनकी तीन आंखें हैं। तीन आंखों वाला होने के कारण इन्हें त्रिनेत्रधारी भी कहते हैं। लाइफ मैनेजमेंट की दृष्टि से देखा जाए तो शिव का तीसरा नेत्र प्रतीकात्मक है। आंखों का काम होता है रास्ता दिखाना और रास्ते में आने वाली मुसीबतों से सावधान करना।
जीवन में कई बार ऐसे संकट भी आ जाते हैं, जिन्हें हम समझ नहीं पाते। ऐसे समय में विवेक और धैर्य ही एक सच्चे मार्गदर्शक के रूप में हमें सही-गलत की पहचान कराते हैं। यह विवेक अत:प्रेरणा के रूप में हमारे अंदर ही रहता है। बस जरूरत है उसे जगाने की।

9. शिव अपने शरीर पर भस्म क्यों लगाते हैं?

हमारे धर्म शास्त्रों में जहां सभी देवी-देवताओं को वस्त्र-आभूषणों से सुसज्जित बताया गया है, वहीं भगवान शंकर को सिर्फ मृग चर्म (हिरण की खाल) लपेटे और भस्म लगाए बताया गया है। भस्म (राख) शिव का प्रमुख वस्त्र भी है, क्योंकि शिव का पूरा शरीर ही भस्म से ढंका रहता है। शिव का भस्म रमाने के पीछे कुछ वैज्ञानिक तथा आध्यात्मिक कारण भी हैं।
भस्म की एक विशेषता होती है कि यह शरीर के रोम छिद्रों को बंद कर देती है। इसका मुख्य गुण है कि इसको शरीर पर लगाने से गर्मी में गर्मी और सर्दी में सर्दी नहीं लगती। भस्म त्वचा संबंधी रोगों में भी दवा का काम करती है। भस्मी धारण करने वाले शिव यह संदेश भी देते हैं कि परिस्थितियों के अनुसार अपने आपको ढालना ही मनुष्य का सबसे बड़ा गुण है।

10. भगवान शिव को क्यों चढ़ाते हैं भांग-धतूरा?

भगवान शिव को भांग-धतूरा मुख्य रूप से चढ़ाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान को भांग-धतूरा चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं। भांग व धतूरा नशीले पदार्थ हैं। आमजन इनका सेवन नशे के लिए करते हैं। लाइफ मैनेजमेंट के अनुसार, भगवान शिव को भांग-धतूरा चढ़ाने का अर्थ है अपनी बुराइयों को भगवान को समर्पित करना।
यानी अगर आप किसी प्रकार का नशा करते हैं तो इसे भगवान को अर्पित करे दें और भविष्य में कभी भी नशीले पदार्थों का सेवन न करने का संकल्प लें। ऐसा करने से भगवान की कृपा आप पर बनी रहेगी और जीवन सुखमय होगा।

11. भगवान शिव को क्यों चढ़ाते हैं बिल्व पत्र?

शिवपुराण आदि ग्रंथों में भगवान शिव को बिल्व पत्र चढ़ाने का विशेष महत्व बताया गया है। 3 पत्तों वाला बिल्व पत्र ही शिव पूजन में उपयुक्त माना गया है। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बिल्वपत्र के तीनों पत्ते कहीं से कटे-फटे न हो।
लाइफ मैनेजमेंट के दृष्टिकोण से देखा जाए तो बिल्व पत्र के ये तीन पत्ते चार पुरुषार्थों में से तीन का प्रतीक हैं- धर्म, अर्थ व काम। जब आप ये तीनों निस्वार्थ भाव से भगवान शिव को समर्पित कर देते हैं तो चौथा पुरुषार्थ यानी मोक्ष अपने आप ही प्राप्त हो जाता है।

12. कैलाश पर्वत क्यों है भगवान शिव को प्रिय?

शिवपुराण के अनुसार, भगवान शिव कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं। पर्वतों पर आम लोग नहीं आते-जाते। सिद्ध पुरुष ही वहां तक पहुंच पाते हैं। भगवान शिव भी कैलाश पर्वत पर योग में लीन रहते हैं। लाइफ मैनेजमेंट की दृष्टि से देखा जाए तो पर्वत प्रतीक है एकांत व ऊंचाई का।
यदि आप किसी प्रकार की सिद्धि पाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको एकांत स्थान पर ही साधना करनी चाहिए। ऐसे स्थान पर साधना करने से आपका मन भटकेगा नहीं और साधना की उच्च अवस्था तक पहुंच जाएगा।
Advertisements

जानिए तोंद कम करने के 10 घरेलू उपचार।

जीवन मंत्र
अनियमित और मसालेदार भोजन के अलावा आरामपूर्ण जीवनशैली के चलते तोंद एक वैश्विक समस्या बन गई है जिसके चलते डायबिटीज और हार्टअटैक का खतरा बढ़ जाता है। तोंद कई अन्य रोगों को भी जन्म देती है। इसके चलते व्यक्ति हमेशा शरीर में अच्छा फिल नहीं कर पाता।
कमर और पेट के आसपास इकट्ठा हुई अतिरिक्त चर्बी से किडनी और मूत्राशय में भी दिक्कतें होना शुरू हो जाती हैं। रीढ़ की हड्डी पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है और जिसके चलते आए दिन कमर दर्द और साइड दर्द होता रहता है। अगर आप तोंद से छुटकारा पाकर फिर से उसे पेट बनाने की सोच रहे हैं तो यहां दिए जा रहे हैं 10 ऐसे उपाय जिसे करने में आपको अतिरिक्त श्रम नहीं करना पड़ेगा। जरूरी नहीं कि सभी 10 उपाय आप आजमाएं। किसी भी एक उपाय को नियमित करें तो 1 माह में लाभ नजर आने लगेगा।
डाइट पर नियंत्रण : यह बहुत जरूरी है लेकिन कुछ लोगों के लिए यह बहुत कठिन टॉस्क है तो वे मानस‌िक उपाय करें। जब उनके सामने फैटी डाइट हो तो वे उससे होने वाले नुकसान के बारे में सोचें और अपनी तोंद को देंखे।ओवर इटिंग से बचना जरूरी है। कोई भी बहाना न बनाएं। खुद के साथ न्याय करें।
योगा टिप्स : प्रतिदिन अंग संचालन करें। सावधान की मुद्रा में खड़े रहकर दोनों हाथों की हथेलियों को कमर पर रखें फिर कमर को क्लॉकवाइज और एंटी-क्लॉकवाइज 10-10 बार घुमाएं।
नौकासन करें : नियमित रूप से यह आसन न सिर्फ पेट की चर्बी कम करने में मददगार है बल्कि शरीर को लचीला बनाने से लेकर पाचन संबंधी समस्याओं में यह काफी फायदेमंद साबित हुआ है।
बादम का सेवन : रोज बादाम का सेवन आपका वजन घटा सकता है। पुरड्यू यूनिव‌र्सिटी के शोध की मानें तो बादाम में मौजूद विटामिन ई और मोनोसैचुरेटेड फैट्स न सिर्फ शरीर में मौजूद सैचुरेटेड फैट्स को कम करने में मदद करता है बल्कि ओवर डाइटिंग से भी बचाता है। रोज हल्के भुने बादाम का सेवन बेहतरीन नाश्ता है जिसे लेने के बाद दिनभर स्नैक्स खाने का मन नहीं करता है, वहीं यह शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है।
उत्तान पादासन : यह एक ऐसा योग है जिसको नियमित करने से तुरंत ही पेट अंदर होने लगता है, खासकर वह अपच, कब्ज, मोटापा, तोंद और अन्य पेट संबंधी बीमारियों से बचाता है।
तोलांगुलासन : वजन तौलते वक्त दोनों तराजू संतुलन में रहते हैं अर्थात तराजू का कांटा बीचोबीच रहता है। उसी तरह इस योगासन में भी शरीर का संपूर्ण भार नितंब पर आ जाता है और व्यक्ति की आकृति तराजू जैसी लगती है इसीलिए इसे तोलांगुलासन कहते हैं।
ऊर्जा चल मुद्रा योग : ऊर्जा चल मुद्रा योग : मोटापा एक समस्या है। इससे पेट, पीठ, कमर और कंधे की समस्या भी बनी रहती है। मोटापे को दूर करने के लिए हम सबसे आसान उपाय बता रहे हैं ऊर्जा चल मुद्रा योग। दरअसल यह अंग संचालन (सूक्ष्म व्यायाम) का हिस्सा है।
कुर्मासन : कुर्मासन का अर्थ होता है कछुआ। इस आसन को करते वक्त व्यक्ति की आकृति कछुए के समान बन जाती है इसीलिए इसे कुर्मासन कहते हैं।
भुजंगासन : इस आसन में शरीर की आकृति फन उठाए हुए भुजंग अर्थात सर्प जैसी बनती है इसीलिए इसको भुजंगासन या सर्पासन कहा जाता है। यह आसन पेट के बल लेटकर किया जाता है। यह आसन भी पेट की चर्बी को घटाने के लिए किया जाता है।
योगा एक्सरसाइज: यदि आपका पेट थुलथुल हो रहा है, कमर मोटी हो चली है या पीठ दुखती रहती है, तो योग की यह हल्की-फुल्की एक्सरसाइज स्टेप बाई स्टेप करें। ‍इस एक्सरसाइज का नियमित अभ्यास करते रहने से निश्चित रूप से जहां पेट फ्लैट हो जाएगा, वहीं कमर भी छरहरी हो जाएगी।
शहद का सेवन : तोंद कम करने में शहद भी फायदेमंद होता है। शहद के कई गुण हैं। यह न सिर्फ मोटापा बढ़ाने, बल्कि मोटापा कम करने में भी कारगर है। आपको चाहिए कि आप रोजाना सुबह पानी के साथ शहद का सेवन करें। इससे आप शीघ्र ही कमर और पेट को कम करने में सफल होंगे।
आप चाहें तो सप्ताह में एक दिन तरल पदार्थ पर भी रह सकते हैं। इसमें आप नींबू पानी, दूध, ज्यूस, सूप इत्यादि चीजों को प्राथमिकता दें। आप चाहें तो एक दिन सलाद या फलाहार को भी दे सकते हैं। इसमें आप मात्र फल या सलाद ही खाएंगे। सलाद खाकर वजन घटाने में आपको मदद मिलगी। 

नवरात्रमें करे इस मंत्र का जप! होगी सभी समस्याए दूर।

माता गायत्री की प्रसन्नता के लिए गायत्री मंत्र का जप सर्वश्रेष्ठ उपाय है। यदि कोई व्यक्ति हर रोज इस मंत्र का जप करता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। अभी मां की कृपा पाने का श्रेष्ठ समय नवरात्र चल रहा है। इन दिनों में गायत्री मंत्र जप से बहुत ही जल्दी शुभ फल प्राप्त किए जा सकते हैं।

यहां जानिए गायत्री मंत्र के उपाय और खास बातें…

गायत्री मंत्र-

ऊँ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।।

गायत्री मंत्र का अर्थ: सृष्टि की रचना करने वाले, प्रकाशमान परमात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, परमात्मा का यह तेज हमारी बुद्धि को सही मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करें।

इस मंंत्र का जप करने के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करना श्रेष्ठ होता है।

शास्त्रों के अनुसार गायत्री मंत्र सर्वश्रेष्ठ मंत्रों में से एक है। इस मंत्र के जप के लिए तीन समय बताए गए हैं। इन तीन समय को संध्याकाल कहा जाता है।

गायत्री मंत्र का जप का पहला समय है प्रात:काल- सूर्योदय से थोड़ी देर पहले मंत्र जप शुरू किया जाना चाहिए। जप सूर्योदय के बाद तक करना चाहिए।

मंत्र जप के लिए दूसरा समय है दोपहर- दोपहर में भी इस मंत्र का जप किया जाता है।

तीसरा समय है शाम को सूर्यास्त से कुछ देर पहले- सूर्यास्त से पहले मंत्र जप शुरू करके सूर्यास्त के कुछ देर बाद तक जप करना चाहिए।

इन तीन समय के अतिरिक्त यदि गायत्री मंत्र का जप करना हो तो मौन रहकर, मानसिक रूप से करना चाहिए। मंत्र जप अधिक तेज आवाज में नहीं करना चाहिए।

मंत्र के जप से मिलते हैं ये 10 लाभ
इस मंत्र के जप से हमें यह दस लाभ प्राप्त होते हैं। ये 10 लाभ इस प्रकार हैं- उत्साह एवं सकारात्मकता मिलती है, त्वचा में चमक आती है, तामसिकता दूर होती है, परमार्थ कार्यों में रुचि जागती है, पूर्वाभास होने लगता है, आशीर्वाद देने की शक्ति बढ़ती है, आंखों में आकर्षण आता है, स्वप्न सिद्धि प्राप्त होती है, क्रोध शांत होता है, ज्ञान की वृद्धि होती है।

विद्यार्थियों के लिए
विद्यार्थियों के लिए तो यह मंत्र विशेष रूप से लाभदायक है। रोजाना इस मंत्र का जप 108 बार करने से विद्यार्थी को विद्या प्राप्त करने में आसानी हो जाती है। विद्यार्थियों का पढ़ने में मन नहीं लगना, याद किया हुआ भूल जाना, शीघ्रता से याद न होना आदि समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है।

दरिद्रता से मुक्ति के लिए
यदि किसी व्यक्ति को व्यापार या नौकरी में हानि हो रही है या कार्य में सफलता नहीं मिलती है, धन की कमी है, व्यय अधिक है तो उन्हें गायत्री मंत्र का जप काफी फायदा पहुंचाता है। शुक्रवार को पीले कपड़े पहनें और हाथी पर विराजमान गायत्री माता का ध्यान करते हुए गायत्री मंत्र का जप 108 बार करें। मंत्र के आगे और पीछे ‘श्रीं’ सम्पुट लगाकर जप करने से दरिद्रता दूर होती है। इसके साथ ही रविवार को व्रत किया जाए तो ज्यादा लाभ होता है।

सम्पुट- जो बीज मंत्र किसी मंत्र के आगे और पीछे लगाए जाते हैं, उन्हें सम्पुट कहा जाता है।

संतान संबंधी परेशानियां दूर करने के लिए
संतान सुख प्राप्त नहीं हो रहा हो अथवा संतान रोगी हो तो रोज सुबह ये उपाय करें। उपाय के अनुसार,, पति-पत्नी सफेद कपड़े पहनकर ‘यौं’ बीज मंत्र का सम्पुट लगाकर गायत्री मंत्र का जप 108 बार रोज करें। ऐसा करने से संतान संबंधी समस्या से शीघ्र मुक्ति मिल सकती है।

शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए
यदि कोई व्यक्ति शत्रुओं के कारण परेशानियां झेल रहा हो तो उसे रोज या मंगलवार, अमावस्या या रविवार को लाल कपड़े पहनकर माता दुर्गा का ध्यान करते हुए गायत्री मंत्र का जप 108 बार करना चाहिए। मंत्र के आगे और पीछे ‘क्लीं’ बीज मंत्र का तीन बार सम्पुट लगाएं। इससे शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। मित्रों में सद्भाव, परिवार में एकता बनी रहती है तथा न्यायालय संबंधी कार्यों में भी विजय प्राप्त होती है।

विवाह में देरी हो रही हो तो
यदि किसी व्यक्ति के विवाह में देरी हो रही हो तो सोमवार को सुबह के समय पीले कपड़े पहनें। माता पार्वती का ध्यान करते हुए’ह्रीं’ बीज मंत्र का सम्पुट लगाकर 108 बार गायत्री मंत्र का जप करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। यह साधना स्त्री-पुरुष दोनों कर सकते हैं।

यदि किसी रोग के कारण परेशानियां हो तो
यदि किसी रोग से परेशान हैं और रोग से मुक्ति जल्दी चाहते हैं तो किसी भी शुभ मुहूर्त में ये उपाय करें। एक कांसे के बर्तन में साफ पानी भरकर रख लें। लाल आसन पर बैठकर ‘ऐं ह्रीं क्लीं’ का सम्पुट लगाकर गायत्री मंत्र का जप 108 बार करें। जप के बाद पानी को पी लें। ऐसा करने से रोगों से मुक्ति मिल सकती है। यही जल किसी दूसरे रोगी को देने से उसके रोग भी दूर हो सकते हैं।
जीवन मंत्र

क्या आप भी चाहते है भारत-पाकिस्तान का युद्ध! तो ये भी जरूर पढ़ ले।

उरी में सैन्य कैंप पर हुए हमले के बाद से ही लगातार इस बात पर चर्चा की जा रही है पाकिस्तान को युद्ध के मैदान में ही सबक सिखाना बेहतर विकल्प हो सकता है. केरल के कोज़ीकोड से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के युद्ध के बजाय गरीबी, बेरोजगारी से लड़ने के आह्वान के बावजूद अभी भी बहुत सारे लोगों को युद्ध का विकल्प ही ज्यादा कारगर नज़र आ रहा है.
अगर आप भी उन लोगों में से है जिन्हें लगता है की युद्ध ही अब इस समस्या का हल है तो आपको खुद को इन बातों के लिए भी तैयार रखना होगा, क्योकि युद्ध की स्थिति में इस तरह की परिस्थितियों से आपको दो चार होना पड़ सकता है:
जीडीपी में जबरदस्त गिरावट: अभी भारत की जीडीपी विकास की दर 8 फीसदी के करीब है और स्थिति सामान्य रही तो यह दर 2019 तक दोहरे अंको तक यानि 10 फीसदी के आस पास पहुँच सकती है. वहीँ युद्ध की स्थिति में जीडीपी में गिरावट दर्ज की जाएगी और यह हमें कम से कम 10 साल पीछे ढकेल देगी.
बढ़ेगी बेरोजगारी: जीडीपी में गिरावट का सीधा असर कंपनियों के लाभ की कमी के रूप में दिखेगा. जिसके बाद कंपनियों को अपने नुकसान को कम करने के उद्देस्य से कॉस्ट कटिंग कर के पूरी करनी होगी, जिसका सीधा मतलब नई नौकरियों का ना आना, कई लोगों के नौकरियों का जाना और कइयों की सैलरी में कटौती होना शामिल है. कुछ वैसा ही जैसा 2008 की मंदी के वक़्त देखने को मिला था.
विकास के पहिये पड़ेंगे सुस्त: 1999 में कारगिल युद्ध के समय एक हफ्ते तक युद्ध करने का खर्च तकरीबन 5000 करोड़ रुपये था. अब युद्ध होने की स्थिति में यह अनुमान लगाया जा रहा है यह खर्च प्रतिदिन 5000 करोड़ रुपये के करीब होगा. ऐसे में अगर यह युद्ध हफ्ते दस दिन भी चला तो भारत सरकार पर भारी आर्थिक दबाव पड़ेगा, और ऐसे में सरकार अपने खर्चे में कटौती करेगी जिसका सीधा असर जनकल्याण योजनाओं में कटौती के रूप में दिखाई दे सकता है.
बढ़ेगी महंगाई: अगर आपको लगता है कि दो सौ रुपये दाल और टमाटर के भाव बहुत ज्यादा थे तो हो सकता है युद्ध की स्थिति में जरुरी चीजों के दाम इससे भी अधिक इजाफा देखने को मिले. युद्ध का सीधा असर बढ़ती महंगाई के रूप में दिखाई देगा.
जवानों की शहादत के लिए रहना होगा तैयार: अगर उरी में 18 जवानों के शहीद होने पर आपका खून खौल रहा है तो यकीन मानिए की युद्ध की स्थिति में आपको अपने सैकड़ों-हजारों सैनिक खोने के लिए तैयार रहना पड़ेगा. आकड़ें बताते हैं कि अभी तक भारत पाकिस्तान में हुए तीन युद्धों में दोनों तरफ से 22,000 से भी ज्यादा सैनिक मारे गए हैं. और अभी युद्ध होने कि स्थिति में भयंकर जान माल के नुकसान का अनुमान है.
100 रुपये तक पहुँच सकता है एक डॉलर का भाव: अर्थव्यवस्था में सुस्ती का असर रुपये में गिरावट के रूप में भी दिखेगा. अनुमान है कि युद्ध कि स्थिति में रुपया लुढ़क कर 100 रुपए प्रति डॉलर के स्तर को छू लेगा. इसका मतलब होगा बाहर देशों से आयात करने वाली हर वस्तु महंगी हो जाएगी. ऐसी स्थिति में पेट्रोल डीजल के भाव भी आसमान पर पहुँच जाएंगे.
परमाणु हमले कि भी बनी रहेगी आशंका: भारत और पाकिस्तान दोनों ही परमाणु हथियार संपन्न देश हैं. ऐसे में अगर भारत को युद्ध के मैदान में भारी पड़ता देख पाकिस्तान अपने परमाणु हथियार के इस्तेमाल की पहल करता है पूरे दक्षिण एशिया में भारी जानमाल का नुकसान देखने को मिलेगा.
क्या अभी भी आपको लगता है कि भारत को पाकिस्तान के साथ युद्ध करना चाहिए, अपनी राय हमें जरूर दे।
धन्यवाद।

जानिए नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर उनके "शून्य" से "शिखर" तक के सफर के बारेमे।

Twitter.com

आज हम बात करेंगे देश के सबसे सफल इंसान के बारेमे आज उनका जन्म दिन भी है साल 1950 में वडनगर गुजरात में बेहद साधारण परिवार में जन्‍मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को यानि के आज के दी ही 66 बरस के हो गए. एक चाय बेचने वाले कभी देश का पीएम भी बनेगा ये किसी ने सोचा नहीं था. मोदी ने राजनीति शास्त्र में एमए किया. बचपन से ही उनका संघ की तरफ खासा झुकाव था और गुजरात में आरएसएस का मजबूत आधार भी था. वे 1967 में 17 साल की उम्र में अहमदाबाद पहुंचे और उसी साल उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता ली. इसके बाद 1974 में वे नव निर्माण आंदोलन में शामिल हुए. इस तरह सक्रिय राजनीति में आने से पहले मोदी कई वर्षों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे.
1980 के दशक में जब मोदी गुजरात की भाजपा ईकाई में शामिल हुए तो माना गया कि पार्टी को संघ के प्रभाव का सीधा फायदा होगा. वे वर्ष 1988-89 में भारतीय जनता पार्टी की गुजरात ईकाई के महासचिव बनाए गए. नरेंद्र मोदी ने लाल कृष्ण आडवाणी की 1990 की सोमनाथ-अयोध्या रथ यात्रा के आयोजन में अहम भूमिका अदा की. इसके बाद वो भारतीय जनता पार्टी की ओर से कई राज्यों के प्रभारी बनाए गए.
मोदी को 1995 में भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय सचिव और पांच राज्यों का पार्टी प्रभारी बनाया गया. इसके बाद 1998 में उन्हें महासचिव (संगठन) बनाया गया. इस पद पर वो अक्‍टूबर 2001 तक रहे. लेकिन 2001 में केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद मोदी को गुजरात की कमान सौंपी गई. उस समय गुजरात में भूकंप आया था और भूकंप में 20 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे.
क्या आप जानते हैं, गुजरात में अपना जादू बिखेरने वाले नरेंद्र मोदी कभी साधु बनना चाहते थे? इतना ही नहीं एक वक्त था जब उन्होंने चाय की दुकान भी लगाई. मोदी के जीवन में इसी तरह के कई उतार-चढ़ाव आए. तो जानिए उनके जीवन से जुड़े दिलचस्प प्रसंग…
नरेंद्र मोदी बचपन में आम बच्चों से बिल्कुल अलग थे. काम भी अलग तरह का कर जाते थे. एक बार वो घर के पास के शर्मिष्ठा तालाब से एक घड़ियाल का बच्चा पकड़कर घर लेकर आ गए. उनकी मां ने कहा बेटा इसे वापस छोड़ आओ, नरेंद्र इस पर राजी नहीं हुए. फिर मां ने समझाया कि अगर कोई तुम्हें मुझसे चुरा ले तो तुम पर और मेरे पर क्या बीतेगी, जरा सोचो. बात नरेंद्र को समझ में आ गई और वो उस घड़ियाल के बच्चे को तालाब में छोड़ आए.
नरेंद्र मोदी को हम कई तरह के गेट अप में देखते हैं. दरअसल स्टाइल के मामले में मोदी बचपन से ही थोड़े अलग थे. कभी बाल बढ़ा लेते थे तो कभी सरदार के गेट अप में आ जाते थे. रंगमंच उन्हें खूब लुभाता था. नरेंद्र मोदी स्कूल के दिनों में नाटकों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे और अपने रोल पर काफी मेहनत भी करते थे.
नरेंद्र मोदी वड़नगर के भगवताचार्य नारायणाचार्य स्कूल में पढ़ते थे. पढ़ाई में नरेंद्र एक औसत छात्र थे, लेकिन पढ़ाई के अलावा बाकी गतिविधियों में वो बढ़चढ़कर हिस्सा लेते थे. एक तरफ जहां वो नाटकों में हिस्सा लेते थे, वहीं उन्होंने एनसीसी भी ज्वाइन किया था. बोलने की कला में तो उनका कोई जवाब नहीं था, हर वाद विवाद प्रतियोगिता में मोदी हमेशा अव्वल आते थे.
बचपन में नरेंद्र मोदी को साधु संतों को देखना बहुत अच्छा लगता था. मोदी खुद संन्यासी बनना चाहते थे. संन्यासी बनने के लिए नरेंद्र मोदी स्कूल की पढ़ाई के बाद घर से भाग गए थे और इस दौरान मोदी पश्चिम बंगाल के रामकृष्ण आश्रम सहित कई जगहों पर घूमते रहे और आखिर में हिमालय पहुंच गए और कई महीनों तक साधुओं के साथ घूमते रहे. नरेंद्र मोदी बहुत मेहनती कार्यकर्ता थे. आरएसएस के बड़े शिविरों के आयोजन में वो अपने मैनेजमेंट का कमाल भी दिखाते थे.
आरएसएस नेताओं का ट्रेन और बस में रिजर्वेशन का जिम्मा उन्हीं के पास होता था. इतना ही नहीं गुजरात के हेडगेवार भवन में आने वाली हर चिट्ठी को खोलने का काम भी नरेंद्र मोदी को ही करना होता था.
90 के दशक में नरेंद्र मोदी ने आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा में बड़ी भूमिका निभाई थी. इसके बाद उन्हें उस वक्त के बीजेपी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी की एकता यात्रा का संयोजक बनाया गया. ये यात्रा दक्षिण में तमिलनाडु से शुरू होकर श्रीनगर में तिरंगा लहराकर खत्म होनी थी.
2001 में जब गुजरात में भूकंप के आने से 20,000 लोग मारे गए तब राज्य में राजनीतिक सत्ता में भी बदलाव हुआ. दबाव के चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल को अपना पद छोड़ना पड़ा. पटेल की जगह नरेंद्र मोदी को राज्य की कमान सौंपी गई और इसके बाद मोदी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. और आज वो देशके सबसे लोकप्रिय राजनेता है
आज तक

व्हाट्सप्प के बारे में 24 ऐसी बातें जिन्हें जानकर आप दबा लेंगे दांतों तले उंगलियाँ

न्यूज़ track
आज की दुनिया में जितना ज्यादा लोकप्रिय फेसबुक है उतना शायद ही कोई और सोशल नेटवर्क हो लेकिन अगर बात की जाये सिर्फ मेसेजिंग एप्लीकेशन की तो व्हाट्सप्प का नाम सबसे ऊपर आता है. और हो भी क्यों ना क्योंकि इसेसे अच्छी मेसेजिंग एप्लीकेशन कोई है ही नहीं. इसे दो दोस्तों ने मिलकर बनाया है जो पहले बहुत गरीब थे. लेकिन इस एप्प्स की लोकप्रियता को देखते हुए फेसबुक जैसे ब्रांड को इसे खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा. तो आइये जानते हैं आज इस सर्विस से जुडी कुछ महत्वपूर्ण बातें…
1. Whatsapp नाम इसलिए चूज़ किया गया क्योकिं इसकी साउंड “Whats UP” “किसी का हाल चाल पूछने” जैसी हैं.
2.Whatsapp के सबसे ज्यादा यूज़र भारत में हैं.
3. Whatsapp ने आज तक विज्ञापन पर एक पैसा भी खर्च नही किया. इसके बावजूद भी व्हाट्सप्प सबसे ज्यादा हिट और पॉपुलर हैं.
4. Whatsapp पांचवी सबसे ज्यादा डाउनलोड की जाने वाली एप्लीकेशन हैं.
5. Whatsapp “no ads” पॉलिसी पर काम करता हैं, आपने कभी व्हाट्सप्प पर किसी और कंपनी के विज्ञापन नही देखे होंगे.
6. Whatsapp टीम में 55 इंजीनियर्स हैं, और एक इंजीनियर्स 18 मिलियन यूसर्स को हेंडल करता हैं.
7. Whatsapp पर हर रोज़ 4300 करोड़ मैसेज भेजे जाते हैं.
8. Whatsapp पर हर रोज़ 160 करोड़ फोटो शेयर किए जाते हैं.
9. Whatsapp पर हर रोज़ 25 करोड़ विडियों शेयर की जाती हैं.
10. Whatsapp का इस्तेमाल 53 भाषाओं में कर सकते हैं.
11. Whatsapp के एक महीने के एक्टिव यूज़र्स 100 करोड़ हैं, जो फेसबुक मैसेंजर से भी ज्यादा हैं.
12. Whatsapp पर 100 करोड़ से भी ज्यादा ग्रुप बने हुए हैं, इनमें से 1-2 तो आपके भी होगें.
13. Whatsapp फाउंडर “Jan Koum” और “Brian Acton” दोनों ने ही 2009 में फेसबुक में एक जॉब के लिए अप्लाई किया था, लेकिन उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया था.
14. व्हाट्सप्प के को-फाउंडर जैन कॉम का जन्म यूक्रेन के एक छोटे से गांव कीव में हुआ था. इनका परिवार इतना गरीब था कि उनके घर में बिजली तक नहीं थी.
15. आपको ज़ानकर हैरानी होगी की Whatsapp बनाने वाले जैन कॉम एक दुकान में सफाई और पोछा लगाने का काम करते थे. लेकिन आज ये अरबपति हैं.
16. 2009 के शुरुआती दिनों में ही व्हाट्सप्प के आविष्कार का बीज पड़ गया। कॉम ने एक आईफोन खरीदा और इस नतीजे पर पहुंचे की आने वाले समय में ऐप्स काफी बड़ी चीज होंगे. उन्होंने सोचा कि एक ऐसा एप्लिकेशन तैयार किया जाए जिसके माध्यम से बड़ी ही आसानी से मैसेजिंग की जा सके.
17. Whatsapp का ट्रायल कुम के कुछ रुसी दोस्तो के फोन पर हुआ था.
18. Whatsapp ने ज़ितनी तेजी से ग्रोथ की है, दुनिया के इतिहास में किसी कंपनी ने नही की.
19. Whatsapp और Skype जैसी सेवाओं की वज़ह से दुनियाभ़र की दूरसंचार कंपनियों को $386 बिलियन का नुकसान उठाना पड़ा हैं.
20. Facebook ने Whatsapp को 1182 अरब रूपए में खरीदा, जो अब तक की सबसे महंगी डील हैं. ये डील 2014 में Valentine’s Day के दिन हुई.
21. अगर आप व्हाट्सप्प पर किसी की प्रोफाइल पिक्चर नही देख पा रहे तो 2 बाते हो सकती हैं, या तो आप उस व्यक्ति की कांटेक्ट लिस्ट में नही हैं या फिर उसने आपको ब्लॉक कर दिया हैं.
22. व्हाट्सप्प की एक साल की कमाई NASA के बज़ट से भी ज्यादा हैं.
23. इन्टरनेट पर खींची गई 27% सेल्फीज़ के लिए व्हाट्सप्प जिम्मेदार हैं.
24. जनवरी 2012, में Whatsapp को IOS App store से बिना बताए रिमूव कर दिया था, लेकिन 4 दिन बाद दोबारा ऐड कर दिया गया.

भर जायेगी आपकी तिजोरी भी! बस करना होगा रात को ये काम..

News Track
जब हम आर्थिक तंगी से गुजर रहे होते हैं, परेशानी में होते हैं या फिर हमारा कोई काम नहीं बन रहा होता है तो हमारे जेहन में बस यहीं विचार उठता रहता है कि कैसे भी, किसी भी तरह से बस ये समस्या दूर हो जाए। सोचते रहते हैं कि काश कोई ऐसा उपाय हो जो इस परेशानी से निजात दिला दे।
ऐसे में आज हम आपको ऐसा ही एक उपाय बता रहे हैं तो आपकी आर्थिक परेशानियों को खत्म करने में आपकी मदद करेगा। वास्तु शास्त्र के मुताबिक अगर आप हर रोज रात के वक्त इस काम को करेंगे तो आप न केवल अपनी आर्थिक तंगी से छुटकारा पा सकेंगे बल्कि आपकी तिजोरी में धन-दौलत से भर जाएगी। वास्तु शास्त्र के जानकारों के मुताबिक अगर आप हर रोज रात के 3 बजे से लेकर 5 बजे के बीच में उठकर घर के उस स्थान पर जाएं जहां से आप खुले आकाश को साफ-साफ देख सकते हों।
खुले आसमान के नीचे पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके आसमान को देखते हुए मां लक्ष्मी को ध्यान करें। दोनों हाथ जोड़कर माता लक्ष्मी की प्रार्थना करें और उनसे अपनी समस्या बताएं। माता लक्ष्मी की प्रार्थना करने के बाद दोनों हाथों को नीचे करके हथेलियों को अपने मुंह पर फेर लें। ऐसा करने से कुछ दिनों में ही आपकी समस्या दूर हो जाएगी और मां लक्ष्मी की कृपा आप पर होने लगेगी।
इसके अलावा अपने मंदिर में थोड़ा बदलाव करें। चूकिं मां लक्ष्मी उत्तर दिशा में वास करती हैं, इसलिए आप माता लक्ष्मी की तस्वीर या फिर श्री रूप उत्तर दिशा की ओर स्थापित करें। इससे उत्तर दिशा सक्रिय होगी और घर में धन का आगमन होगा।