ये हैं भारत की 5 सबसे कर्जदार कंपनियां, बैंकों के हैं अरबों बकाया।

ये हैं भारत की 5 सबसे कर्जदार कंपनियां, बैंकों के हैं अरबों बकाया

बैंकों के डूबे हुए कर्ज (एनपीए) लगातार बढ़ते जा रहे हैं और इसका सबसे बड़ा कारण कुछ कंपनियां हैं। इन कंपनियों ने भारी कर्ज ले रखा है। वे या तो डिफॉल्ट कर रही हैं या कर्ज रीस्ट्रक्चरिंग के लिए बैंकों पर दबाव बना रही हैं। इन कंपनियों पर कर्ज भारत के कई राज्यों के बजट से भी ज्यादा है। क्रेडिट सुइस ने अपनी रिपोर्ट में भारत की सबसे कर्जदार कंपनियों के नाम दिए हैं, जो इस प्रकार है…

रिलांयस एडीएजी: 1.13 लाख करोड़ का है कर्ज

अनिल अंबानी की अगुआई वाले समूह एडीएजी ग्रुप पर सबसे ज्यादा कर्ज है। इस पर करीब 1.13 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। इसके लिए अनिल अंबानी पूरे ग्रुप की रीस्ट्रक्चरिंग पर फोकस कर रहे हैं। अनिल अंबानी की कंपनी डिफेंस, फाइनेंस, टेलिकॉम, ऊर्जा और मनोरंजन के क्षेत्र में काम करती है। आपको बता दें कि मार्च 2015 की बैलेंसशीट में अनिल अंबानी की कंपनी ने 1.25 लाख करोड़ रुपए का घाटा दिखाया था।

वेदांता ग्रुप: 90 हजार करोड़ का कर्ज

क्रेडिट सुइस की रिपोर्ट के मुताबिक, अनिल अग्रवाल की अगुआई वाले वेदांता ग्रुप पर 90,000 करोड़ रुपए से ज्यादा कर्ज है। यह भारत की दूसरी सबसे ज्यादा कर्ज वाली कंपनी है। अगले वित्त वर्ष से कंपनी को 100 करोड़ डॉलर (करीब 6,694 करोड़ रुपए) के लोन की रीपेमेंट करनी है, जबकि इसके बाद अगले 2 साल में कंपनी को हर साल 150 करोड़ डॉलर (10,000 करोड़ रुपए) लोन की रीपेमेंट करनी है।
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जयप्रकाश एसोसिएट ग्रुप: 85 हजार करोड़ का कर्ज

जेपी ग्रुप इन्फ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट, पावर और सीमेंट कारोबार में शामिल है। मनोज गौड़ के जेपी ग्रुप पर 31 मार्च 2015 तक कुल कर्ज 85,726 करोड़ रुपए था, जबकि कंपनी की कुल एसेट करीब 1 लाख करोड़ रुपए है। जेपी ग्रुप अपना कर्ज घटाने के लिए एसेट बेच रहा है, जिसके तहत कंपनी ने पिछले दिनों दिल्ली-आगरा एक्सप्रेसवे के बेचने की भी बात कही थी। 2006 से 2012 के बीच कंपनी ने 60,000 करोड़ रुपए रियल एस्टेट में निवेश किए थे, लेकिन रियल एस्टेट की हालत खराब होने के बाद कंपनी की मुश्किलें भी बढ़ती चली गईं।

अडानी ग्रुप: 72 हजार करोड़ का कर्ज

अडानी ग्रुप के मालिक गौतम अडानी हैं। कंपनी पर कुल 72,632 करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है। ऑस्ट्रेलिया में अडानी ग्रुप को माइन के लिए एसबीआई के 100 करोड़ डॉलर के लोन पर एनालिस्ट ने सवाल खड़े किए थे। कंपनी पहले ही भारी कर्ज तले दबी है। ऐसे में इस कंपनी को और लोन देना कितना उचित है। कंपनी पर शॉर्ट टर्म कर्ज 17,267 करोड़ और लॉन्ग टर्म कर्ज करीब 55,364 करोड़ रुपए है।

जेएसडब्ल्यू ग्रुप: 58 हजार करोड़ का कर्ज

सज्जन जिंदल की कंपनी जेएसडब्ल्यू ग्रुप पर कुल 58 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है। सज्जन जिंदल हाल ही में पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मुलाकात कराने के कारण सुर्खियों में रहे हैं। जेएसडब्ल्यू स्टील सेक्टर की बड़ी कंपनी है, लेकिन विदेश से आयात होने वाले सस्ते स्टील के कारण उसे घाटे का सामना करना पड़ रहा हे।
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जानने योग्य बाते।

1- 90 प्रतिशत रोग केवल पेट से होते हैं। पेट में कब्ज नहीं रहना चाहिए। अन्यथा रोगों की कभी कमी नहीं रहेगी।
2- कुल 13 अधारणीय वेग हैं
3-160 रोग केवल मांसाहार से होते है
4- 103 रोग भोजन के बाद जल पीने से होते हैं। भोजन के 1 घंटे बाद ही जल पीना चाहिये।
5- 80 रोग चाय पीने से होते हैं।
6- 48 रोग ऐलुमिनियम के बर्तन या कुकर के खाने से होते हैं।
7- शराब, कोल्डड्रिंक और चाय के सेवन से हृदय रोग होता है।
8- अण्डा खाने से हृदयरोग, पथरी और गुर्दे खराब होते हैं।
9- ठंडेजल (फ्रिज)और आइसक्रीम से बड़ीआंत सिकुड़ जाती है।
10- मैगी, गुटका, शराब, सूअर का माँस, पिज्जा, बर्गर, बीड़ी, सिगरेट, पेप्सी, कोक से बड़ी आंत सड़ती है।
11- भोजन के पश्चात् स्नान करने से पाचनशक्ति मन्द हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है।
12- बाल रंगने वाले द्रव्यों(हेयरकलर) से आँखों को हानि (अंधापन भी) होती है।
13- दूध(चाय) के साथ नमक(नमकीन
 पदार्थ) खाने से चर्म रोग हो जाता है।
14- शैम्पू, कंडीशनर और विभिन्न प्रकार के तेलों से बाल पकने, झड़ने और दोमुहें होने लगते हैं।
15- गर्म जल से स्नान से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है। गर्म जल सिर पर डालने से आँखें कमजोर हो जाती हैं।
16- टाई बांधने से आँखों और मस्तिश्क हो हानि पहुँचती है।
17- खड़े होकर जल पीने से घुटनों(जोड़ों) में पीड़ा होती है।
18- खड़े होकर मूत्रत्याग करने से रीढ़ की हड्डी को हानि होती है।
19- भोजन पकाने के बाद उसमें नमक डालने से रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) बढ़ता है।
20- जोर लगाकर छींकने से कानों को क्षति पहुँचती है।
21- मुँह से साँस लेने पर आयु कम होती है।
22- पुस्तक पर अधिक झुकने से फेफड़े खराब हो जाते हैं और क्षय(टीबी) होने का डर रहता है।
23- चैत्र माह में नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध हो जाता है मलेरिया नहीं होता है।
24- तुलसी के सेवन से मलेरिया नहीं होता है।
25- मूली प्रतिदिन खाने से व्यक्ति अनेक रोगों से मुक्त रहता है।
26- अनार आंव, संग्रहणी, पुरानी खांसी व हृदय रोगों के लिए सर्वश्रेश्ठ है।
27- हृदयरोगी के लिए अर्जुनकी छाल, लौकी का रस, तुलसी, पुदीना, मौसमी,सेंधा नमक, गुड़, चोकरयुक्त आटा, छिलकेयुक्त अनाज औशधियां हैं।
28- भोजन के पश्चात् पान, गुड़ या सौंफ खाने से पाचन अच्छा होता है। अपच नहीं होता है।
29- अपक्व भोजन (जो आग पर न पकाया गया हो) से शरीर स्वस्थ रहता है और आयु दीर्घ होती है।
30- मुलहठी चूसने से कफ बाहर आता है और आवाज मधुर होती है।
31- जल सदैव ताजा(चापाकल, कुएं आदि का) पीना चाहिये, बोतलबंद (फ्रिज) पानी बासी और अनेक रोगों के कारण होते हैं।
32- नीबू गंदे पानी के रोग (यकृत, टाइफाइड, दस्त, पेट के रोग) तथा हैजा से बचाता है।
33- चोकर खाने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। इसलिए सदैव गेहूं मोटा ही पिसवाना चाहिए।
34- फल, मीठा और घी या तेल से बने पदार्थ खाकर तुरन्त जल नहीं पीना चाहिए।
35- भोजन पकने के 48 मिनट के अन्दर खा लेना चाहिए। उसके पश्चात् उसकी पोशकता कम होने लगती है। 12 घण्टे के बाद पशुओं के खाने लायक भी नहीं रहता है।।

जानिए भुत के बारे मे कैसे और कोन बनता है भुत।

परिचय
जिसका कोई वर्तमान न हो, केवल अतीत ही हो वही भूत कहलाता है। अतीत में अटका आत्मा भूत बन जाता है। जीवन न अतीत है और न भविष्य वह सदा वर्तमान है। जो वर्तमान में रहता है वह मुक्ति की ओर कदम बढ़ाता है।

आत्मा के तीन स्वरुप माने गए हैं

जीवात्मा, प्रेतात्मा और सूक्ष्मात्मा। जो भौतिक शरीर में वास करती है उसे जीवात्मा कहते हैं। जब इस जीवात्मा का वासना और कामनामय शरीर में निवास होता है तब उसे प्रेतात्मा कहते हैं। यह आत्मा जब सूक्ष्मतम शरीर में प्रवेश करता है, उस उसे सूक्ष्मात्मा कहते हैं। भूत-प्रेतों की गति एवं शक्ति अपार होती है। इनकी विभिन्न जातियां होती हैं और उन्हें भूत, प्रेत, राक्षस, पिशाच, यम, शाकिनी, डाकिनी, चुड़ैल, गंधर्व आदि कहा जाता है।

भूतों के प्रकार

हिन्दू धर्म में गति और कर्म अनुसार मरने वाले लोगों का विभाजन किया है- भूत, प्रेत, पिशाच, कूष्मांडा, ब्रह्मराक्षस, वेताल और क्षेत्रपाल। उक्त सभी के उप भाग भी होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार 18 प्रकार के प्रेत होते हैं। भूत सबसे शुरुआती पद है या कहें कि जब कोई आम व्यक्ति मरता है तो सर्वप्रथम भूत ही बनता है। इसी तरह जब कोई स्त्री मरती है तो उसे अलग नामों से जाना जाता है। माना गया है कि प्रसुता, स्त्री या नवयुवती मरती है तो चुड़ैल बन जाती है और जब कोई कुंवारी कन्या मरती है तो उसे देवी कहते हैं। जो स्त्री बुरे कर्मों वाली है उसे डायन या डाकिनी करते हैं। इन सभी की उत्पति अपने पापों, व्याभिचार से, अकाल मृत्यु से या श्राद्ध न होने से होती है।

84 लाख योनियां
पशुयोनि, पक्षीयोनि, मनुष्य योनि में जीवन यापन करने वाली आत्माएं मरने के बाद अदृश्य भूत-प्रेत योनि में चले जाते हैं। आत्मा के प्रत्येक जन्म द्वारा प्राप्त जीव रूप को योनि कहते हैं। ऐसी 84 लाख योनियां है, जिसमें कीट-पतंगे, पशु-पक्षी, वृक्ष और मानव आदि सभी शामिल हैं। प्रेतयोनि में जाने वाले लोग अदृश्य और बलवान हो जाते हैं। लेकिन सभी मरने वाले इसी योनि में नहीं जाते और सभी मरने वाले अदृश्य तो होते हैं लेकिन बलवान नहीं होते। यह आत्मा के कर्म और गति पर निर्भर करता है। बहुत से भूत या प्रेत योनि में न जाकर पुन: गर्भधारण कर मानव बन जाते हैं। पितृ पक्ष में हिन्दू अपने पितरों का तर्पण करते हैं। इससे सिद्ध होता है कि पितरों का अस्तित्व आत्मा अथवा भूत-प्रेत के रूप में होता है। गरुड़ पुराण में भूत-प्रेतों के विषय में विस्तृत वर्णन मिलता है। श्रीमद्‍भागवत पुराण में भी धुंधकारी के प्रेत बन जाने का वर्णन आता है।

अतृप्त आत्माएं बनती है भूत

जो व्यक्ति भूखा, प्यासा, संभोगसुख से विरक्त, राग, क्रोध, द्वेष, लोभ, वासना आदि इच्छाएं और भावनाएं लेकर मरा है अवश्य ही वह भूत बनकर भटकता है। और जो व्यक्ति दुर्घटना, हत्या, आत्महत्या आदि से मरा है वह भी भू‍त बनकर भटकता है। ऐसे व्यक्तियों की आत्मा को तृप्त करने के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। जो लोग अपने स्वजनों और पितरों का श्राद्ध और तर्पण नहीं करते वे उन अतृप्त आत्माओं द्वारा परेशान होते हैं।

यम नाम की वायु

वेद अनुसार मृत्युकाल में ‘यम’ नामक वायु में कुछ काल तक आत्मा स्थिर रहने के बाद पुन: गर्भधारण करती है। जब आत्मा गर्भ में प्रवेश करती है तब वह गहरी सुषुप्ति अवस्था में होती है। जन्म से पूर्व भी वह इसी अवस्था में ही रहती है। जो आत्मा ज्यादा स्मृतिवान या ध्यानी है उसे ही अपने मरने का ज्ञान होता है और वही भूत बनती है।

जन्म मरण का चक्र

जिस तरह सुषुप्ति से स्वप्न और स्वप्न से आत्मा जाग्रति में जाती हैं उसी तरह मृत्युकाल में वह जाग्रति से स्वप्न और स्वप्न से सु‍षुप्ति में चली जाती हैं फिर सुषुप्ति से गहन सुषुप्ति में। यह चक्र चलता रहता है।

भूत की भावना

भूतों को खाने की इच्छा अधिक रहती है। इन्हें प्यास भी अधिक लगती है, लेकिन तृप्ति नहीं मिल पाती है। ये बहुत दुखी और चिड़चिड़ा होते हैं। यह हर समय इस बात की खोज करते रहते हैं कि कोई मुक्ति देने वाला मिले। ये कभी घर में तो कभी जंगल में भटकते रहते हैं।

भूत की स्थिति
ज्यादा शोर, उजाला और मंत्र उच्चारण से यह दूर रहते हैं। इसीलिए इन्हें कृष्ण पक्ष ज्यादा पसंद है और तेरस, चौदस तथा अमावस्या को यह मजबूत स्थिति में रहकर सक्रिय रहते हैं। भूत-प्रेत प्रायः उन स्थानों में दृष्टिगत होते हैं जिन स्थानों से मृतक का अपने जीवनकाल में संबंध रहा है या जो एकांत में स्थित है। बहुत दिनों से खाली पड़े घर या बंगले में भी भूतों का वास हो जाता है।

भूत की ताकत
भूत अदृश्य होते हैं। भूत-प्रेतों के शरीर धुंधलके तथा वायु से बने होते हैं अर्थात् वे शरीर-विहीन होते हैं। इसे सूक्ष्म शरीर कहते हैं। आयुर्वेद अनुसार यह 17 तत्वों से बना होता है। कुछ भूत अपने इस शरीर की ताकत को समझ कर उसका इस्तेमाल करना जानते हैं तो कुछ नहीं। कुछ भूतों में स्पर्श करने की ताकत होती है तो कुछ में नहीं। जो भूत स्पर्श करने की ताकत रखता है वह बड़े से बड़े पेड़ों को भी उखाड़ कर फेंक सकता है। ऐसे भूत यदि बुरे हैं तो खतरनाक होते हैं। यह किसी भी देहधारी (व्यक्ति) को अपने होने का अहसास करा देते हैं। इस तरह के भूतों की मानसिक शक्ति इतनी बलशाली होती है कि यह किसी भी व्यक्ति का दिमाग पलट कर उससे अच्छा या बुरा कार्य करा सकते हैं। यह भी कि यह किसी भी व्यक्ति के शरीर का इस्तेमाल करना भी जानते हैं। ठोसपन न होने के कारण ही भूत को यदि गोली, तलवार, लाठी आदि मारी जाए तो उस पर उनका कोई प्रभाव नहीं होता। भूत में सुख-दुःख अनुभव करने की क्षमता अवश्य होती है। क्योंकि उनके वाह्यकरण में वायु तथा आकाश और अंतःकरण में मन, बुद्धि और चित्त संज्ञाशून्य होती है इसलिए वह केवल सुख-दुःख का ही अनुभव कर सकते हैं।

अच्‍छी और बुरी आत्मा

वासना के अच्छे और बुरे भाव के कारण मृतात्माओं को भी अच्छा और बुरा माना गया है। जहां अच्छी मृतात्माओं का वास होता है उसे पितृलोक तथा बुरी आत्मा का वास होता है उसे प्रेतलोक आदि कहते हैं। अच्छे और बुरे स्वभाव की आत्माएं ऐसे लोगों को तलाश करती है जो उनकी वासनाओं की पूर्ति कर सकता है। बुरी आत्माएं उन लोगों को तलाश करती हैं जो कुकर्मी, अधर्मी, वासनामय जीवन जीने वाले लोग हैं। फिर वह आत्माएं उन लोगों के गुण-कर्म, स्वभाव के अनुसार अपनी इच्छाओं की पूर्ति करती है। जिस मानसिकता, प्रवृत्ति, कुकर्म, सत्कर्मों आदि के लोग होते हैं उसी के अनुरूप आत्मा उनमें प्रवेश करती है। अधिकांशतः लोगों को इसका पता नहीं चल पाता। अच्छी आत्माएं अच्छे कर्म करने वालों के माध्यम से तृप्त होकर उसे भी तृप्त करती है और बुरी आत्माएं बुरे कर्म वालों के माध्यम से तृप्त होकर उसे बुराई के लिए और प्रेरित करती है। इसीलिए धर्म अनुसार अच्छे कर्म के अलावा धार्मिकता और ईश्वर भक्ति होना जरूरी है तभी आप दोनों ही प्रकार की आत्मा से बचे रहेंगे।

कौन बनता है भूत का शिकार

धर्म के नियम अनुसार जो लोग तिथि और पवित्रता को नहीं मानते हैं, जो ईश्वर, देवता और गुरु का अपमान करते हैं और जो पाप कर्म में ही सदा रत रहते हैं ऐसे लोग आसानी से भूतों के चंगुल में आ सकते हैं। इनमें से कुछ लोगों को पता ही नहीं चल पाता है कि हम पर शासन करने वाला कोई भूत है। जिन लोगों की मानसिक शक्ति बहुत कमजोर होती है उन पर ये भूत सीधे-सीधे शासन करते हैं। जो लोग रात्रि के कर्म और अनुष्ठान करते हैं और जो निशाचारी हैं वह आसानी से भूतों के शिकार बन जाते हैं। हिन्दू धर्म अनुसार किसी भी प्रकार का धार्मिक और मांगलिक कार्य रात्रि में नहीं किया जाता। रात्रि के कर्म करने वाले भूत, पिशाच, राक्षस और प्रेतयोनि के होते हैं।

महाभारत की 10 अनसुनी कहानी। (10 untold stories on mahabharat)

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महाभारत की कहानियाँ हम बचपन से सुनते आ रहे हैं, टेलीविज़न पर देखते आ रहे है फिर भी हम सब महाभारत के बारे में बहुत कुछ नहीं जानते है क्योकि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत बहुत ही बड़ा ग्रंथ है, इसमें एक लाख श्लोक है। आज हम आपको महाभारत की कुछ ऐसी ही कहानियां पढ़ाएंगे  जो आपने शायद पहले कभी नहीं पढ़ी होगी। तो आइये शुरुआत करते है मामा शकुनि से।  हम सब मानते है की शकुनि कौरवों का सबसे बड़ा हितैषी था जबकि है इसका बिलकुल विपरीत। शकुनि ही कौरवों के विनाश का सबसे बड़ा कारण था, उसने ही कौरवों का वंश समाप्त करने के लिए महाभारत के युद्ध की पृष्टभूमि तैयार की थी।  पर उसने ऐसा किया क्यों ? इसका उत्तर जानने के लिए हमे ध्रतराष्ट्र और गांधारी के विवाह से कथा प्रारम्भ करनी पड़ेगी।

ध्रतराष्ट्र का विवाह गांधार देश की गांधारी के साथ हुआ था। गंधारी की कुंडली मैं दोष होने की वजह से एक साधु के कहे अनुसार उसका विवाह पहले एक बकरे के साथ किया गया था। बाद मैं उस बकरे की बलि दे दी गयी थी। यह बात गांधारी के विवाह के समय छुपाई गयी थी. जब ध्रतराष्ट्र को इस बात का पता चला तो उसने गांधार नरेश सुबाला और उसके 100 पुत्रों को कारावास मैं डाल दिया और काफी यातनाएं दी।

एक एक करके सुबाला के सभी पुत्र मरने लगे। उन्हैं खाने के लिये सिर्फ मुट्ठी भर चावल दिये जाते थे। सुबाला ने अपने सबसे छोटे बेटे शकुनि को प्रतिशोध के लिये तैयार किया। सब लोग अपने हिस्से के चावल शकुनि को देते थे ताकि वह जीवित रह कर कौरवों का नाश कर सके। मृत्यु से पहले सुबाला ने ध्रतराष्ट्र से शकुनि को छोड़ने की बिनती की जो ध्रतराष्ट्र ने मान ली। सुबाला ने शकुनि को अपनी रीढ़ की हड्डी क पासे बनाने के लिये कहा, वही पासे कौरव वंश के नाश का कारण बने।

शकुनि ने हस्तिनापुर मैं सबका विश्वास जीता और 100 कौरवों का अभिवावक बना। उसने ना केवल दुर्योधन को युधिष्ठिर के खिलाफ भडकाया बल्कि महाभारत के युद्ध का आधार भी बनाया।

एक वरदान के कारण द्रोपदी बनी थी पांच पतियों की पत्नी :
द्रौपदी अपने पिछले जन्म मैं इन्द्र्सेना नाम की ऋषि पत्नी थी। उसके पति संत मौद्गल्य का देहांत जल्दी ही हो गया था। अपनी इच्छाओं की पूर्ति की लिये उसने भगवान शिव से प्रार्थना की। जब शिव उसके सामने प्रकट हुए तो वह घबरा गयी और उसने 5 बार अपने लिए वर मांगा। भगवान शिव ने अगले जन्म मैं उसे पांच पति दिये।

एक श्राप के कारण धृतराष्ट्र जन्मे थे अंधे :
धृतराष्ट्र अपने पिछले जन्म मैं एक बहुत दुष्ट राजा था। एक दिन उसने देखा की नदी मैं एक हंस अपने बच्चों के साथ आराम से विचरण कर रहा हे। उसने आदेश दिया की उस हंस की आँख फोड़ दी जायैं और उसके बच्चों को मार दिया जाये। इसी वजह से अगले जन्म मैं वह अंधा पैदा हुआ और उसके पुत्र भी उसी तरह मृत्यु को प्राप्त हुये जैसे उस हंस के।

अभिमन्यु था कालयवन राक्षस की  आत्मा :
कहा जाता हे की अभिमन्यु एक कालयवन नामक राक्षस की आत्मा थी। कृष्ण ने कालयवन का वध कर, उसकी आत्मा को अपने अंगवस्त्र मैं बांध लिया था। वह उस वस्त्र को अपने साथ द्वारिका ले गये और एक अलमारी मैं रख दिया। सुभद्रा (अर्जुन की पत्नी) ने गलती से जब वह अलमारी खोली तो एक ज्योति उसके गर्भ मैं आगयी और वह बेहोश हो गयी। इसी वजह से अभिमन्यु को चक्रव्यूह भेदने का सिर्फ आधा ही तरीका बताया गया था।

एकलव्य ही बना था द्रोणाचार्ये की मृत्यु का कारण :
एकलव्य देवाश्रवा का पुत्र था। वह जंगल मैं खो गया था और उसको एक निषद हिरण्यधनु ने बचाया था। एकलव्य रुक्मणी स्वंयवर के समय अपने पिता की जान बचाते हुए मारा गया।  उसके इस बलिदान से प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने उसे वरदान दिया की वह अगले जन्म मैं द्रोणाचर्य से बदला ले पायेगा। अपने अगले जन्म मैं एकलव्य द्रष्टद्युम्न बनके पैदा हुआ और द्रोण की मृत्यु का कारण बना।

पाण्डु की इच्छा अनुसार पांडवो ने खाया था अपने पिता के मृत शरीर को :
पाण्डु ज्ञानी थे।  उनकी अंतिम इच्छा थी की उनके पांचो बेटे उनके म्रत शरीर को खायैं ताकि उन्होने जो ज्ञान अर्जित किया वो उनके पुत्रो मैं चला जाये। सिर्फ सहदेव ने पिता की इच्छा का पालन करते हुए उनके मस्तिष्क के तीन हिस्से खाये। पहले टुकड़े को खाते ही सहदेव को इतिहास का ज्ञान हुआ, दूसरे टुकड़े को खाने पे वर्तमान का और तीसरे टुकड़े को खाते ही भविष्य का।  हालांकि ऐसी मान्यता भी है की पांचो पांडवो ने ही मृत शरीर को खाया था पर सबसे ज्यादा हिस्सा सहदेव ने खाया था।      
कुरुक्षेत्र में आज भी है मिट्टी अजीब :
कुरुक्षेत्र मैं एक जगह हे, जहां माना जाता हे की महाभारत का युध् हुआ था। उस जगह कुछ 30 किलोमीटर के दायरे में  मिट्टी संरचना बहुत अलग हे। वैज्ञानिक समझ नहीं पा रहे की यह कैसे संभव हे क्यूंकि इस तरह की मिट्टी सिर्फ तब हो सकती हे अग

शरीर के तिल के रहस्‍यों के बारे में जानिए

शरीर पर पाया जाने वाला तिल सुंदरता तो बढ़ाता ही है साथ ही आपके जीवन के कई रहस्‍यों को भी उजागर करता है।

शरीर के तिलशरीर पर पाये जाने वाले तिल यानी मोल्‍स आपकी सुंदरता तो बढ़ाते हैं, यह प्राकृतिक रूप से होते हैं और कुछ लोग इसे हटा भी देते हैं। शरीर के किसी भी हिस्‍से में तिल हो सकता है, चाहे वह पैर हो या चेहरा। लेकिन शरीर पर पाये जाने वाले इन तिलों का अलग-अलग ज्‍योतिषीय महत्‍व होता है। अगर आपके शरीर में भी तिल है तो उसके महत्‍व के बारे में भी जानिए।


माथे के दायें हिस्‍से में तिलअगर आपके माथे के दाये हिस्‍से में तिल है तो इसका मतलब है कि आप धनवान होंगे। आपके पास पैसे की कमी नहीं होगी|


माथे के बायें हिस्‍से में तिलअगर आपके माथे के बायें हिस्‍से में तिल है तो इसका मतलब आपका व्‍यक्तिगत जीवन कष्‍टकारी हो सकता है। यह दर्शाता है कि आप अपना जीवन व्‍याकुलता में बितायेंगे।


माथे के बीच में तिल
अगर आपके माथे के बीच में तिल है तो यह आपके लिए शुभ संकेत की तरह है। चेहरे के इस हिस्‍से में तिल के कारण आपके पूरे जीवन में पैसे की कमी नहीं होगी और आपका यश भी फैलेगा, यानी आप पैसे वाले तो होंगे साथ ही आपकी प्रसिद्धि भी होगी।


ठोढ़ी पर तिल
अगर आपके ठोढी पर तिल है तो भविष्‍य में आपको बहुत ध्‍यान देने की जरूरत है। यह दर्शाता है कि इसके कारण आपके जीवनसाथी से कलह की संभावना बहुत अधिक है।


दाहिने आंख पर तिलअगर आपके दाहिने आंख पर तिल है तो यह शुभ संकेत है। इसके कारण आपको पूरी जिंदगी आपके जीवनसाथी से प्‍यार मिलता रहेगा।

बाईं आंख पर तिलअगर आपके बाईं आंख पर तिल है तो यह आपके लिए शुभ संकेत नहीं हैं, इसके कारण आपको पूरी जिंदगी संघर्ष के साथ गुजारना पड़ सकता है। 


गाल पर तिलअगर आपके गाल के दाहिने हिस्‍से में तिल है यह शुभ संकेत है। यह दिखाता है कि आप धनवान बनेंगे। लेकिन अगर आपके बायें गाल पर तिल है तो यह अशुभ है, यह दिखाता है कि आप हमेशा पैसे के अभाव में जियेंगे।

होठों पर तिलहोठों पर तिल होने का मतलब है कि आपके अंदर बहुत प्‍यार भरा हुआ है, यह आपकी कामुक प्रवृत्ति को भी दर्शाता है।


कानों पर तिल
अगर आपके दाहिने कान पर तिल है तो इसका मतलब है कि आपकी जिंदगी बहुत छोटी है, लेकिन अगर आपके बायें कान पर तिल है तो यह शुभ है। बायें कान पर तिल दिखाता है कि आप हमेशा दुर्घटनाओं से बचेंगे।


गर्दन पर तिल
गर्दन पर तिल बहुत ही शुभ होता है, यह दिखाता है कि आपकी पूरी जिंदगी आलीशान तरीके से बीतेगी और आपकी उम्र भी लंबी होगी।


हाथों पर तिल
अगर आपके दाहिने हाथ पर तिल है तो यह आपकी वीरता का संकेत है और इसके कारण लोग आपका सम्‍मान करेंगे। बायें हाथ पर तिल दिखाता है कि आपको पुत्र ही होगा।


पैरों में तिल
अगर आपके किसी पैर में तिल है तो यह आपकी असीमित यात्रा का संकेत हैं, यानी आपकी पूरी जिंदगी यात्रा में बीत सकती है।

आपके शरीर की कुछ ऐसी बाते

आपके शरीर की कुछ ऐसी बाते जिसके बारे में आपको कम पता होगा

आज मैं आपको बताने जा रहा हू शरीर से जुडी ऐसी बाते जिसके बारे में शायद आप कम ही जानते हो 

1.छींकते वक्त व्यक्ति की आंखे अवश्य ही बन्द होगी।

2.जीवन भर में 25 करोड़ बार आंखे झपकाते है।

3.24 घण्टे मे हम २२,999 बार सांस लेते है।

4.मनुष्यो को उंगलियो की छाप से पहचाना जा सकता है, उसी प्रकार जानवरो को उनकी नाक की छाप से

5.मनुष्य के शरीर मे इतना फास्फोरस होता है कि माचिस की 4 डिबियां बनाई जा सकती है।

6.क्रोध के लिए चेहरे की 43 मांसपेशिया सक्रिय होती है मुस्कराने के लिए 17 मांसपेशियां अर्थात क्रोध करने से मनुष्य की अधिक उर्जा व्यय होती है मुस्कराने से कम।

7.मनुष्य का दायां पैर बाएं की अपेक्षा कुछ अधिक लम्बा होता है।

8.शरीर का सबसे सखत पदार्थ इनेमल होता है जो दांत की उपर परत पर चड़ा रहता है।

9.यदि आकाश में बादल छाये हों और हम खुले मे बैठें तो भी हमारी त्वचा काली पड सकता है क्योकि बादलो के कारण धूप तो हम तक नही पहुंचेगी किन्तु सूर्य की 80% घातक पराबैंगनी किरणें आर पार निकलकर हम तक पहुंच सकता है।

जनरल नॉलेज

छोटी लेकिन काम की बातें

– प्राणदायक वायु ऑक्सीजन की खोज जोसेफ प्रिस्टले ने की।

– फूलों के अरेंजमेंट की जापानी आर्ट को इकेबाना कहा जाता है। 

– दुनिया की सबसे बड़ी नदी नील नदी है। 

– दुनिया के सबसे बड़े जलप्रपात नियाग्रा फॉल की खोज लुईस हेन्नेपिन ने की। 

– नोबेल पुरस्कार की शुरुआत 1895 में की गई।

– तिब्बत को सामान्यत: दुनिया की छत कहा जाता है। 

– पेरिस के एफिल टॉवर का निर्माण अलेक्जेंडर एफिल ने करवाया था।

– मशहूर मोनालिसा की तस्वीर लियोनार्डो द विंसी द्वारा बनाई गई।

– ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है।

– दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान सहारा है। 

– दुनिया का सबसे बड़ा महासागर प्रशांत महासागर है।

– ऑस्ट्रेलिया की खोज जेम्स कुक ने की थी।

– 15 अगस्त को भारत के साथ-साथ दक्षिण कोरिया भी अपने स्वाधीनता पर्व को मनाता है। 

– न्यूयॉर्क शहर का निक नेम बिग एप्पल है।