जडेजा का संघर्ष, 10 रूपये रोजाना पर जिए और पूरा किया मां का सपना।

कई लोग सपना देखते है कुछ बनने का Success होने का और अपनी मेहनत और लगन के दम पर वह सफल होते भी है। आज बात करेंगे ऐसे ही सौराष्ट्र के लड़के के यानि रविंद्र जडेजा के बारेमे।
जडेजा ने काफी संघर्ष कर सफलता हासिल की है। एक समय था जब उन्हें रोज के खर्चे के लिए केवल 10 रूपये मिलते थे। क्रिकेट खेलने के लिए उनकी दीवानगी इतनी ज्यादा थी कि वे नींदों में भी क्रिकेट की बातें करते थे।
जडेजा को क्रिकेटर बनाने में उनकी मां का बड़ा योगदान था लेकिन जब जडेजा को टीम इंडिया में जगह मिली तो वे इस दुनिया में नहीं थीं। उनकी मां नर्स थी और पिता वॉचमैन थे, इसके चलते उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था लेकिन जडेजा ने अपनी जिद के बूते क्रिकेट को अपना कॅरियर बनाया। जडेजा का जन्म गुजरात के जामनगर जिले के नवगाम खेड में छह दिसंबर 1988 को हुआ। उनके पिता अनिरूद्ध सिंह सेना में थे लेकिन एक इंजरी के चलते उन्हें फौज छोड़नी पड़ी और सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करनी पड़ी। उनकी मांग लता नर्स थी।
नींदों में भी देखते थे Cricketer बनने का सपना।
जडेजा क्रिकेट को लेकर काफी पैशनेट थे और नींदों में भी पकड़ो, फेंकों बोलते रहते थे। इस पर उनके पिता उन्हें पूर्व क्रिकेटर महेन्द्र सिंह चौहान के पास ले गए। हालांकि उनके पिता चाहते थे रवीन्द्र जडेजा सेना में जाए लेकिन पत्नी लता के कहने पर उन्होंने यह मंशा छोड़ दी।
उनके पिता बताते हैं कि मैं रवीन्द्र को एक आर्मी ऑफिसर के रूप में देखना चाहता था लेकिन उसने क्रिकेट को चुना। मैंने उसे कहाकि जो करना है उसे बेस्ट करो वर्ना ना ऑफिसर बन पाएगा और ना क्रिकेटर। जडेजा अपनी मां के काफी करीब थे और जब उनका निधन हुआ तो वे काफी टूट गए। उन्होने क्रिकेट छोड़ने का फैसला कर लिया था लेकिन अपनी बड़ी बहन के कहने पर उन्होंने खुद को संभाला। मां के निधन के बाद बहन ने ही जडेजा को सहारा दिया। जिस साल उनकी मां का निधन हुआ उसी साल जडेजा को सौराष्ट्र टीम में जगह मिली।
16 साल की उम्र में खेला अंडर-22 टूर्नामेंट
उनके कोच बताते हैं कि जडेजा सबसे पहले मैदान में प्रेक्टिस में आता और सबसे अंत में जाता। वह घंटों तक बल्लेबाजी करता रहता, घंटों बॉलिंग करता और इसी तरह फील्डिंग करता। जडेजा बचपन में काफी शैतान भी थे लेकिन कोच महेन्द्र सिंह के एक थप्पड़ ने उन्हें समझदार बना दिया। इस बारे वे बताते हैं कि एक क्लब मैच में मैंने उसे सीनियर खिलाडियों के खिलाफ खिलाया। उसकी पहली दो गेंदों पर एक चौका और छक्का लगा। मैंने बीच ओवर में उसे थप्पड़ मार दिया इसके बाद उसने पहली बार पांच विकेट लिए वो भी केवल 33 रन देकर।
वे कहते हैं कि मैंने सबसे ज्यादा उसे मारा लेकिन मैं जानता था कि वह भारत के लिए खेलेगा। 2002 में जडेजा ने सौराष्ट्र अंडर-14 टीम की ओर से खेलते हुए पहले ही मैच में 87 रन बनाए और 72 रन पर चार विकेट लिए। अगले एक साल में अपने जबरदस्त प्रदर्शन के बूते उन्हें अंडर-19 टीम में जगह मिल गई। वहीं 16 साल की उम्र में अंडर-22 टीम में एंट्री मिली। इसी के चलते अंडर-19 टीम इंडिया में जगह मिली। इस टूर्नामेंट में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार विकेट लिए जबकि फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 16 रन पर तीन विकेट लिए जिसके चलते पाक 125 रन पर सिमट गया हालांकि यह मैच भारत हार गया।

तीन तिहरे शतक लगाने वाले
जडेजा ने 121 वनडे में 1804 रन बनाए जिसमें 10 अर्धशतक शामिल है। इसमें उन्होंने 144 विकेट भी लिए हैं। वहीं 12 टेस्ट में 45 विकेट लिए हैं और 364 रन बनाए हैं। दिलचस्प बात है कि जडेजा ने घरेलू क्रिकेट में तीन तिहरे शतक लगाए हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक भी शतक नहीं लगा पाए हैं।
पहले मैच में फिफ्टी से नंबर वन गेंदबाज तक
जडेजा ने अपने प्रदर्शन केे बूते फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू करने से पहले ही इंडिया ए में जगह बना ली थी। 2006-07 में जडेजा ने सौराष्ट्र की ओर रणजी ट्रॉफी में कदम रखा। 2008 में जडेजा ने एक बार फिर अंडर-19 वर्ल्ड कप खेला। विराट कोहली की कप्तानी में खेले गए इस टूर्नामेंट को भारत ने जीता और जडेजा ने 10 विकेट लिए। इसके बाद राजस्थान रॉयल्स ने रवीन्द्र जडेजा को आईपीएल के लिए साइन कर लिया। जडेजा की काबिलियत को देखकर शेन वार्न ने उन्हें रॉक स्टार क हा। अगले साल उन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 10 मैच में 776 रन बनाए और 45 विकेट भी लिए। वहीं लिस्ट ए में 198 रन बनाए और छह विकेट लिए थे। इसके बूते उन्हें श्रीलंका दौरे के लिए वनडे टीम में शामिल किया गया। अपने पहले ही वनडे में उन्होंने नाबाद 60 रन बनाए। हालांकि जडेजा को असली पहचान मिली 2013 चैंपियंस ट्रॉफी से। 2015 टूर्नामेंट में उन्होंने सबसे ज्यादा विकेट लिए और गोल्डन बॉल जीती। साथ ही ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरिज में 25 विकेट लिए, साथ ही छह में से 5 बार विपक्षी कप्तान माइकल क्लार्क को आउट किया। 2015 मै जडेजा वनडे के नंबर वन गेंदबाज बन थेे।
जडेजा ने अपनी life में जो कुछ पाया है अपनी मेहनत के दम पर दोस्तों हम भी अपनी life में success हो सकते है। बस शर्ट ये है कि आप को अपने काम continue, लगन और धीरज के साथ करना होगा। So friends आप को ये story अच्छी लगे तो कृपिया Share करना न भूले।
धन्यवाद।
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सफलता के लिए ज़रूरी है Focus !

ऐसा  क्यों  होता  है  कि  कई बार  सब  कुछ  होते  हुए  भी  हम  वो  नहीं  कर  पाते  जिसको  करने  के  बारे  में   हमने  सोचा  होता  है ….दृढ  निश्चय  किया  होता ……खुद  को  promise किया  होता  है  कि  हमें  ये  काम  करना  ही  करना  है …चाहे  जो  हो  जाए ….!!!

“सब  कुछ  होते  हुए” से  मेरा  मतलब  है  आपके  पास  पर्याप्त  talent, पैसा ,  समय , या  ऐसी  कोई  भी  चीज  जो  उस  काम  को  करने  के  लिए  ज़रूरी  है ;  होने  से  है .

2009-10 ek vyakti ne अपने  दोस्तों  के  साथ  मिल  कर  Bodhitree Consulting Group (BCG) की  शुरुआत  की  थी , इसके  अंतर्गत  हमने  कुछ  Personality Development ओर  Quizzing से  related programs भी  किये , जो  काफी  पसंद किये  गए ,….पर  within 6-7 months BCG को  बंद  करना  पड़ा .

आज  जब  vo  इस  बारे  में  सोचता  hai कि  आखिर  BCG क्यों  unsuccessful रहा  …तो  use ऐसी  कोई  वजह  नहीं  दिखती  जो  इस  ओर  इशारा  करे  की  हमारे  team में  Talent, Time , या  पैसे  की  कमी  थी ….हमारे  अन्दर  जोश  भी  काफी  था ….पर  फिर  भी  हम  इस  venture को  successful नहीं  बना  पाए .

तो  आखिर  वजह  क्या थी ?

वजह  थी  FOCUS.

चूँकि  BCG शुरू  करने  का  initiative uska  ही  था  इसलिए  मुझे  इसपर  पूरी  तरह  से  अपना  ध्यान  केन्द्रित  करना  चाहिए  था …..पर vo उस  वक़्त   अपनी  Tata Aig की  जॉब  में  इतना  अधिक  involve था  कि  मैं  BCG पर focus नहीं  कर  पाया …और  सबकुछ  होते  हुए  भी  इसे  सफल  नहीं  बना  पाए .

यह  एक  शाश्वत  सत्य  है  कि  सम्पूर्ण  ब्रह्माण्ड में  हम  जिस  चीज  पर  ध्यान  केन्द्रित  करते  हैं  उस  चीज  में  आश्चर्यजनक  रूप  से  विस्तार  होता  है . इसलिए  सफल  होने  के  लिए  हमें  अपने  चुने  हुए  लक्ष्य   पर  पूरी  तरह  से  focussed होना  होगा ; और  तभी  हम  उसे  हकीकत  बनते  देख  पायेंगे .

Focus करने  का  क्या अर्थ  है ?

एक  idea लो  . उस  idea को  अपनी  life बना  लो – उसके  बारे  में  सोचो  उसके  सपने  देखो , उस  idea को  जियो  . अपने  दिमाग , muscles, nerves, शरीर  के  हर  हिस्से  को  उस  आईडिया  में  डूब  जाने  दो , और  बाकी  सभी  ideas को  किनारे  रख  दो . यही सफल  होने  का  तरीका  है , यही  वो  तरीका  है  जिससे  महान  लोग  निर्मित  होते  हैं .

Friends, उपरोक्त  कथन Swami  Vivekananda के  हैं  और  मुझे  लगता  है  कि  Focus शब्द को  शायद  ही  इससे  अच्छे  ढंग  से  समझा  जा  सकता  है .

इस कथन में जहाँ स्वामी जी ने  किसी एक आईडिया को अपनाना आवश्यक बताया  है वहीँ दूसरी तरफ इस दौरान अन्य ideas को किनारे रखने के लिए भी कहा है. और सही मायने में यही है Focussed होना.

Focus करता  क्या  है  ?

आपने  बचपन  में  lens ज़रूर use किया  होगा ….lens देखने  में  तो  एक  साधारण  कांच  का  टुकड़ा  लगता  है …पर  जब  हम  उसे  कागज़  के  किसी  एक  हिस्से  पर  focus करते   हैं  तो  थोड़ी  देर  में  वो  कागज़  जलने  लगता  है …..

Focus  चीजों  को  संभव  बनाता  है ….जब  आप  भी  अपने  goal पर  focused रहते  हैं  तो  मार्ग  में  आने  वाली  बाधाएं   जल  कर  ख़ाक  हो  जाती  हैं , आपका  रास्ता  साफ़  हो  जाता   है , और  आप  अपना  goal achieve कर  पाते  हैं . Focus आपको  सिर्फ  यह  नहीं  बताता  कि  करना  क्या  है  , यह  भी  बताता  है  कि  क्या  नहीं  करना  है .Focus आपको  आपके  goal से  बांधता  ही  नहीं  , आपको   बेकार  की  चीजों  में  बंधने  से  बचाता  भी  है .

सफल होना है तो ए 10 बाते हमेशा ध्यान रखे !

आम इंसान मेहनत तो करते है लेकिन सफलता नहीं मिलती और उसी के कारन वो निराश हो जाते है लेकिन उन्हें निराश होने की जरुरत नहीं है वो भी अपने जीवन में कुछ बदलाव लाकर अपनी Life को बेहतर और successful बना सकते है। इसी लिए ध्यान में रखने वाली 10 बाटे आपके साथ शेयर कर रहा हूँ।

1. जो समय बीत चूका है उसे बदल नहीं सकते तो उसके बारे में सोच कर पछताने से अच्छा है
अपने भविष्य को बेहतर बनाना । इसलिए बीती बातो को छोड़ कर आगे के बारे में सोचो और
खाली बैठने की जगह कोई न कोई काम करों।

2. ये बात अच्छी तरह समझ लीजिये की दुनिया में जो भी है वो सबकुछ बदलेगा, फिर चाहे आप
उन बदलावों को अपनाये या नहीं । इसलिए दुनिया के बदलने से पहले खुद को इतना बदल दो
की इस दुनिया के बदले से पहले आप दुनिया का आगे आ कर स्वागत करो की देखो मैं यहाँ पहले
से पहुच गया हूँ। मेरा मतलब है ऐसा काम करने की कोशिश करो जो आज तक किसी ने न किया हों । मशहूर हों जाओगे।

3. जब भी कोई नया काम शुरू करो तो उसे ये सोच कर शुरू करो की ये मेरा आखरी मौका है
और अगर में इसमें पास नहीं हुआ तो मुझे और कोई मौका नहीं मिलेगा। इसलिए चाहे कुछ
भी हों जाये मुझे ये मौका हाथ से निकलने नहीं देना हैं।

4. हमेशा अपने आपको नये होने वाले बदलावों और आगे आने वाली कठिनाइयों का सामना करने के लिए तैयार रखो।
जिससे आप अपनी मंजिल आसानी से हासिल कर सको। वरना ऐसे पछताना पड़ेगा जैसे
वक़्त पर पढाई न करने वाला स्टूडेंट पछताता हैं की काश में पहले से तैयारी करके रखता तो फ़ैल न होता।

5. कभी भी पुरानी बातो को ले कर बैठे नहीं रहें। इससे आप किसी का कुछ नहीं बिगाड़ सकते उलटे खुद का ही
नुकसान करोगे। बेहतर होगा की अतीत को भुला कर कुछ नया करने की सोचे।

6. कहते है की जब एक रास्ता बंद हों जाता है तो भगवान 100 और रस्ते खोल देता हैं।
इसलिए हमे किसी काम में असफलता मिलने पर घबराना नहीं चाहिए बल्कि ये पता करना चाहिए
की इस काम को करने का दूसरा तरीका क्या हैं।

7. कभी भी किसी काम को कल पर न छोड़े, हर काम को अपना आखरी काम मान कर अच्छे से करना चाहियें।
कल के भरोशे काम छोड़ने वालो को दुनिया में आलसी और असफल कहा जाता हैं।

8. कभी भी किसी काम में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। अगर ऐसा करोगे तो आपको उसके बारे में कुछ भी समझ नहीं
आएगा और आपको उसमे असफलता ही मिलेगी। इसलिए हर काम को काम समझ कर करे और उसकी
बारीकी तक पहुचे जिससे भविष्य में आपको उसमे परेशानी न हों।

9. अगर कभी आप किसी काम में अकेले पड़ जाओ तो घबराये नहीं। आप अकेले नहीं हों जो मंजिल पर न पहुचोगे।
दुनिया के 70% कामयाब लोगो ने अकेले ही सफ़र तय किया हैं।

10. कहते है की एक पागल की बातो में भी कोई न कोई अच्छी सिख मिल जाती हैं।
इसलिए कभी भी किसी की सलाह को नज़रंदाज़ मत करो। उसके बारे में बारीकी से सोचो और सोच कर उसे जवाब दो।
हों सकता है उसमे आपका कोई फायदा हों।

धन्यवाद freind
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अपनी इन 5 आदतोमे बदलाव लाकर आप भी बना सकते है अपनी जिन्दगी को आसान और…

किसी ने सच ही कहा है की “अपनी जिंदगी में आप सबसे बुरी स्थिति की उम्मीद करेंगे तो शायद कभी हताश, परेशान या उदास नहीं होंगे।”
लेकिन हममे से कितने लोग ऐसा सोचते हैं ? शायद कुछ लोग ही। हम सब अक्सर पुरानी बातों को लेकर ही उलझे रहते है और उन्ही से उबरने में ही जूझते रहते हैं, और अपनी जिंदगी को बेहद कठिन और मुश्किलों  भरा बना लेते हैं और ऐसी स्थिति में हमें सिर्फ और सिर्फ नकारात्मक चीजें ही ध्यान में आती हैं,  लेकिन हमें ये याद रखना होगा की आगे बढ़ने के लिए और  जिंदगी में कुछ मुकाम  हासिल  करने के लिए हमें इस मानसिकता को बदलना  होगा और अपना ध्यान पॉजिटिव बातों पर लगाना होगा।  
राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने कहा था:
आपकी धारणाएँ आपके विचार बन जाते हैं,
आपके विचार आपके शब्द बन जाते हैं,
आपके शब्द आपके कर्म बन जाते हैं,
आपके कर्म आपकी आदतें बन जाती हैं,
आपकी आदतें आपके मूल्य बन जाते है,
और आपके मूल्य आपकी तकदीर बन जाती है|
~महात्मा गाँधी
बापू का ये उद्धरण हमारी आदतों के बारे में साफ और सीधे शब्दों में बहुत कुछ बयां कर जाता है, और हमें प्रेरित करता है की अगर हमें अपनी तकदीर बदलनी है तो हमें अपनी आदतों में भी बदलाव लाना होगा और अपनी जिंदगी को नयी दिशा प्रदान करनी होगी।  
ख़ुशी की बात तो ये है की ये बदलाव लाना बिलकुल आसान है; और नाकारात्मक  से साकारात्मक नजरिये तक पहुँचने के लिए हमें सिर्फ अपनी रोजमर्रा की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव लाने होंगे. ये बदलाव क्या होने चाहिए आईये जानते हैं:

अपने आप से सच बोलें : हम जाने अनजाने में हमेशा अपने आप से बात करते रहते हैं और हमारे दिमाग में हमेशा कुछ न कुछ विचार घूमता रहता है, इसी बात पर ध्यान देना शुरू करें और अपने आप से आप कैसी बात कर रहे है उसपर ध्यान देना शुरू करें, और इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कम से कम खुद से आप झूठ कभी न बोलें और खुद को धोख़ा कभी न दें। किसी की भी शिकायत करने से भी बचें!

दूसरों पर आरोप लगाने से बचें: कुछ भी गलत होने पर जिम्मेदारी खुद लेने की बजाय हम अक्सर दूसरों पर आरोप लगाने के बहाने खोजने लगते हैं और दूसरों पर फ़ौरन आरोप मढ़ देते हैं, ऐसा करना फ़ौरन बंद करें।   बातों को पकड़कर मत बैठ जाइये बल्कि उन्हें बीत जाने दीजिये ऐसा करने से आपको भावात्मक आज़ादी(इमोशनल  फ्रीडम ) तो मिलेगी ही और भावनाओं के जाल से मुक्ति पाते ही अद्भुत ख़ुशी भी मिलेगी। 

चिंता छोड़ो सुख से जियो: आपने अक्सर पढ़ा और सुना होगा की चिंता चिता के सामान होती है और चिंता करने से कुछ मिलता तो बिलकुल नहीं है, हाँ हमारी खुशियां जरूर छिन जाती हैं। चिंता करके हम ऐसी चीज़ों को पकड़े रहते हैं जिन्हें पकड़ने की कोई जरूरत नहीं होती है। हम अक्सर बंद होते हुए दरवाजे को इतनी शिद्दत से  देखते रहते हैं की खुलते दरवाजों पर हमारा ध्यान ही नहीं जा पाता। जो हुआ वो हो चुका है उससे आगे बढिए और नए मौकों की तलाश में जिंदगी गुजारिये।  

ज्यादा उम्मीद करना छोड़ें: जीवन में अगर साकारात्मक बदलाव लाना है तो सबसे पहले उम्मीद करना छोड़ दीजिये, ऐसे करते ही आप देखेंगे की आपका जीवन खुशियों से भरने लगेगा। जीवन में बेहतर होने के लिए प्रयासरत अवश्य रहें और चीजों से संतुष्ट रहें और जो भी आपके पास है उसकी प्रशंशा करें और ईश्वर के प्रति आभारी रहें।

हमेशा ख़ुशी की उम्मीद न करें: सुख दुःख जीवन का एक चक्र है लेकिन अक्सर दुःख के बादल देखकर ही हम तिलमिला जाते हैं और अपना होश खो देते हैं, लेकिन ये याद रखें कि दुःख भी हमारे जीवन का हिस्सा है। यह जरूरी भी है, क्योंकि दुःख से ही हमारा दिमाग, शरीर और आत्मा मजबूत होती है। हमारे जीवन में सिर्फ अच्छी चीज़ें होंगी तो हम कभी मजबूत नहीं बन पाएंगे, और आगे आने वाली परेशानियों और परिस्थितियों से जूझने के लिए तैयार नहीं हो पाएंगे।  

उम्मीद करता हूँ कि इन छोटे-छोटे उपायों पर अमल करके आप भी अपनी जिंदगी में अद्भुत बदलाव लाने में सफल होंगे। ये लेख कैसा लगा, हमें जरूर बताएं। आपकी प्रतिक्रियाएं हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं। धन्यवाद !!

जानिए कैसे बना एक गोल कीपर इंडियन क्रिकेट का सबसे बड़ा कप्तान?। MS Dhoni biography in hindi

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Hello friends,
अगर कोई भी इंसान चाहे तो क्या नहीं कर सकता अपने मेहनत और लगन के दम पर कोई भी मुकाम हासिल कर सकता है Success हो सकता है। वो उस बुलंदियो पर पोहच सकता है जहा वो पोहचना चाहे और आज हम बात करंगे ऐसी ही व्यक्तित्व के बारेमे हमारे कप्तान कुल के बारेमे MS Dhoni के बारेमे।
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बहोत कम लोग जानते होंगे की लंबे बालो वाला यह सितारा कभी क्रिकेटर नहीं गोल कीपर हुवा करता था। जो की Syamali, Ranchi की जवाहर विद्या मंदिर की पढाई कर रहे था 20 साल पहले एक दिन क्रिकेट टीम का विकेटकीपर नहीं आया तो टीम के कोच Kesav Ranjan benrgi ने 13 साल के धोनी को बुलाया और कहा के क्या तुम विकेट कीपिंग करोगे। तो धोनी ने उसपर कहा के क्या चान्स मिलेंगा तो कोच ने सीधे धोनी को ग्लब्स थमा दिए। 13 साल के Mahi इससे पहले कभी क्रिकेट नहीं खेले। लेकिन धोनी कभी भी किसी भी काम को करने तैयार रहते हे इसी लिए उन्होंने हां कह दीया।
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वही एक मोका था जहा से गोल कीपिंग से लेकर बना क्रिकेट की History का सबसे बेहतरीन कप्तान में से एक MS Dhoni की कहानी। माही ने 7 वि क्लास से विकेट कीपिंग का स्टार्ट किया और वहा से ही विकेट कीपिंग की सरूआत हुई। और स्कूल के इसी चान्स ने Mahi की जिंदगी बदलकर रख दी। और आज उसी वजह से आज माहि Indian क्रिकेट टीम के सबसे सफल कप्तान है।
मगर कोई नहीं जानता था की 35 साल पहले 2 कमरो के सरकारी flat में पेदा होने वाले Dhoni एक दिन 500cr से ज्यादा के मालिक होंगे। Ranchi मेकॉन कम्पोनी के छोटे मकान में dhoni पढ़े और बड़े हुवे। माहि अपने भाई बहनो में सबसे छोटे थे उनके पिता Pansing मेकॉन कम्पोनी में ही सामान्य पम्प Operator थे।
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पापा की कम आम दनी की वजह से उस वक्त Dhoni के पास कोचिंग और क्रिकेट किट के लिए पैसा नहीं हुवा करते थे। इसी लिए Dhoni बगैर किट और कोच के ही Practice करते। और खेलने के लिए माहि उधार ग्लब्स लेते और वे उधार के ग्लब्स से ही अपनी हर एक match खेलते। इसी लगन और मेहनत की वजह से माहि का असर school में और लोगो के दिमाग पर होने लगा। फिर 1999 में 10 वि class में माहि को मोका मिला उन्हें Inter school में opening के लिए उतारा गया।
यही वो match था जिसमे dhoni की बल्ले की धार सबने देखि उस मैच में धोनी ने 150 बोल 23 चोक्के 6 छक्के की मदद से 214 रन बनाये। उसी वजह से 1999 में ही धोनी को Center poll pre ltd में जगह मिली जिसमे उन्हें मैच खेलने महीने 2200rp मिलते। जो बहोत कम थे लेकिन dhoni को कोई गम नहीं था वो तो बस क्रिकेट खेले जा रहे थे। उसी साल क्रिकेट मैच की वजह से उन्होंनि अपनी SSC की exam बीच में छोड़ दी।
क्योंकि Dhoni को क्रिकेट में आगे जाना था इसी लिए धोनी ने रेलवे रायजी टीम में खेलने की कोसिस की मगर 2 बार selection में फ़ैल हो गए। मगर हार नहीं मने भले रायजी में जगह न मिली रेलवे में नोकरी जरूर मिल गयी। और बादमे में उन्हें रायजी में भी जगह मिल गई लेकिन उनकी पोस्टिंग खड़कपुर/दुर्गापुर में पोस्टिंग होने की वजह से धोनी क्रिकेट को ज्यादा समय नहीं दे प् रहे थे। मगर क्रिकेट के प्रती प्यार और लगन आखिर माहि को Ranchi खिंच ही लाया।
उसके बाद जो हुवा वो पूरी दुनिया ने देखा। महज 2 साल International match खेलने के बाद ही माहि टीम के कप्तान बन गए और एक से बढ़कर एक Record अपने नाम करते गए चाहे वो 2007 का T20 World cup हो या 2011 World cop ऐसे कई रिकॉर्ड बत ओर कॅप्टन MS Dhoni नाम पर है आज वो Indian team के सबसे Success कप्तान है।
दोस्तों आप भी dhoni के जीवन से प्रेणना लेकर अपने जीवन में बहुत कुछ कर सकते है।
तो आपको को धोनी के जीवन की biography केसी लगी अपनी राइ हमें जरूर दे। और इस Ms Dhoni की biography को अपने दोस्तों और रिस्तेदारो को Share करना न भूले। सैयद आपके एक शेयर से Motivation मिले और वो भी अपने जीवन में Dhoni की तरह आगे बढे।
धन्यवाद।

Marketing में लोग क्यों fail होते है ???

Hello friends

अक्षर Marketing में लोग क्यों लोग फेल हो जाते है उसकी कई वजह है। जिसमे जो प्रमुख वजह है जो आपको Success होने से रोकती है वो में आपके साथ शेयर कर रहा हूँ।

1 विश्वास नहीं होता अपने आप पर और Organization पर।

2 सबकी Negative बाटे सुनते है और उनकी बातो में आ जाते है।

3 सर्म आती है कैसे बताये इस बारेमे।

4 कोई ना बोल देगा तो, अगर असफल हुआ तो लोग क्या कहेंगे।

5 लगातार (Continue) काम नहीं करते।

6 अपने काम पर निष्ठा और धैर्य नहीं रखते और सफलता एक ही जटके में चाहिए।

में आप लोगो से सवाल करता हूँ Job करने वाला, दूध बेचने वाला News paper वाला, Student, Artist, Doctor ये सब सफ्ताह में एक बार महीने में एक बार काम करेंगे चलेगा।
दो लोगो की सुनकर काम बांध कर देंगे और लड़ने लग जाते है। जेसे की करोडो दुब गए है। ये नहीं देखते Furniture वाला, showroom वाला, Restaurant वाला, Beauty Parlar वाला, लाखो रूपया डालता है फिर भी business पहले दिन से सुरु नहीं होता वो कमसे कम 3 साल अपने बिज़नेस को देता है बाद में वो किसी फैसले पे आता है।
Advocate, Doctor, Artist, सब पढाई करने के 5 साल स्ट्रगल करते है। तब जाके कही वो सेट होते है। इसी लिए positive रहो पुरे जोश के साथ कम करो। सबसे Important आप अपने आप को देखो अपनी गलती को देखो अपने आप में सुधर लाव।  
दोस्तों सफलता ऐसे ही नहीं मिलती इसके लिए मेहनक करनी पड़ती है निष्ठा एवं घीरज रखनी पड़ती है। मार्केटिंग में लोगो के साथ संवाद करना पड़ता है। लोगो की हा/ना सुन्नी पड़ती है तब जाके आप सफ़ल हो सकते हो। 
जेसे की BILL BRITT (Network Marketing king Bussiness man or Billionaire) हुवे थे लेकिन ऐसे ही नहीं हुवे। एक बार खुद उन्होंने कहा था की जब मेने मार्केटिंग की सरूआत की तब मेने 1200 सो लोगो को Plan दिखाया था 900 लोगो ने मना कर दिया हा कहने वाले 300 लोगो में से सिर्फ 85 ने कुछ कार्य वाही की थी उन 85 में से भी सिर्फ 35 ही काम के प्रति संजीदा थे और उनमे से भी सिर्फ 11 ने मुझे करोड़पति बनाया। 
Bill का एक ही सूत्र था की यदि आप भी इतना धैर्यवान और अपने लक्ष्य के प्रति इतने ही निष्ठावान है तो ऐसी ही सफलता आपके चरण चूमेंगी। 
धन्यवाद।

23 साल की उम्र में अपनी मेहनत के दम पर अरबपति बने थे Mark zuckerberg।


अगर इंसान चाहे तो क्या नहीं कर सकता इंसान चाहे तो अपने हर फेलियर को सक्सेस में बदल सकता है इस ही एक्जाम्पल है 23 साल का वो लड़कालड़का जिसने रच दिया इतिहास  जिसने पूरी 80cr लोगो को जोड़कर बना दी दुनिया की सबसे बड़ी सोशियल साईट
‘सवाल यह नहीं है कि लोग आपके बारे में क्या जानना चाहते हैं बल्कि सवाल यह है कि लोग अपने बारे में क्या बताना चाहते हैं.’ यह बात मार्क जकरबर्ग ने 2011 में एक इंटरव्यू में कही थी. फेसबुक के लिए कही गई मार्क की यह बात साबित करती है कि लोगों के लिए कम्युनिकेशन का इससे बढ़िया कोई तरीका नहीं है. फेसबुक की जबरदस्त सफलता के चलते मार्क जकरबर्ग 2007 में अरबपति बन गए थे. उस वक्त वो सिर्फ 23 साल के थे.
1. मार्क के जुनून का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि 12 साल की उम्र से ही उन्हें कंप्यूटर से लगाव था. उनका लगाव प्रोग्रामिंग डेलवपमेंट तब और बढ़ा जब उनके पिता ने उन्हें C++ नाम की एक किताब तोहफे में दी. इसके बाद जकरबर्ग ने एक ऐसा बेसिक मैसेजिंग प्रोग्राम जकनेट बनाया था जिसका इस्‍तेमाल उनके पिता अपने डेंटल ऑफिस में करते थे. इस प्रोग्राम के जरिए उनकी रिसेपशनिस्ट उन्हें इंफॉर्म करती थी.
2. जकरबर्ग का मानना है कि सफलता की एक ही गारंटी हैं लाइफ में रिस्क लेना. मार्क ने कभी भी नौकरी का लालच नहीं किया. 17 साल की उम्र में मार्क ने दोस्तों के साथ मिलकर सिनेप्स मीडिया प्लेयर बनाया जो यूजर की पसंद के गानों को स्टोर कर लेता था.
3. जकरबर्ग में सीखने की इतनी ललक थी कि फेसबुक से पहले उन्होंने फेसेसमास नाम से एक वेबसाइट बनाई थी. इस साइट में दो स्टूडेंट की फोटो की एक साथ तुलना की जा सकती और यह तय किया जा सकता था कि कौन ज्यादा हॉट है. इस वेबसाइट से स्कूल में काफी विवाद हो गया. स्टूडेंट्स का मानना था कि इस तरह फोटो अपलोड करना उनकी पर्सनल लाइफ में दखलअंदाजी करने के बराबर है. लेकिन मार्क ने हिम्मत नहीं हारी और फेसेसमास के यूजर्स की संख्या करीब 10 लाख तक पहुंच गई.
4. 2004 में जकरबर्ग ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर द फेसबुक नाम से एक ऐसी साइट बनाई थी जिस पर यूजर अपना प्रोफाइल बना सके और फोटो अपलोड कर सकें. इसके बाद जकरबर्ग ने कॉलेज छोड़ दिया और अपना पूरा समय फेसबुक को देने लगे. फेसबुक की कामयाबी का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि 2004 के आखिर तक तरह फेसबुक के 1 मिलियन यूजर्स हो गए.
5. 2005 में वेंचर कैपिटल एक्सेल पार्टनर ने 12.7 मिलियन डॉलर फेसबुक नेटवर्क में निवेश किए. सबसे पहले फेसबुक को आईवे लीग के स्टूडेंट्स के लिए खोला गया इसके बाद दूसरे कॉलेजों, स्कूलों, इंटरनेशनल स्कूलों के लोग भी इससे जुड़ने लगे. दिसंबर 2005 तक इस साइट की मेंबरशिप 5.5 मिलियन यूजर्स हो गई.
6. फेसबुक को इस ऊंचाई तक पहुंचाने में जकरबर्ग को काफी परेशानियों का भी सामना करना पड़ा. एक बार तो हावर्ड कनेक्शन के क्रिएटर्स ने उन पर आरोप लगाया कि जकरबर्ग ने उनका आइडिया चुराया है. इस वजह से मार्क को उन्हें नुकसान की भरपाई करनी होगी.
7. इन सबके बावजूद टाइम मैग्जीन ने 2010 में उन्हें पर्सन ऑफ द ईयर और फोर्ब्स ने उन्‍हें दुनिया के सबसे श्‍ाक्तिशाली लोगों की लिस्‍ट में 35वीं रैंक दी. मार्च 2015 में जारी आंकड़ों के मुताबिक फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग की अनुमानित आय 35.1 बिलियन अमेरिकी डाॅलर की संपत्ति है. फेसबुक के सीईओ के तौर पर जकरबर्ग की सैलरी एक डॉलर है.
8. 2013 में फेसबुक ने फॉर्च्यून की लिस्ट में जगाह बनाई और जकरबर्ग इस लिस्ट में 28 साल के सबसे कम उम्र के सीइओ थे.
9. 2010 में अमेरिका में मार्क जकरबर्ग की लाइफ पर आधारित फिल्म ‘द सोशल नेटवर्क’ भी रिलीज हो चुकी है.
10. जकरबर्ग के नाम पर 50 पेटेंट्स हैं. इनमें से सबसे पहला 2004 में जारी किया गया, जिसका नाम सिनेप्स मीडिया प्लेयर है.